Hariyana Ship Breakers के सितंबर तिमाही के नतीजे निवेशकों के लिए चिंता का विषय हैं। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू शून्य रहा है और ऑडिटर्स ने इसकी एसेट रिकवरी और भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
शून्य रेवेन्यू और ऑडिटर्स की चेतावनी
सितंबर 2026 को समाप्त हुई तिमाही में Hariyana Ship Breakers का ऑपरेशन्स से रेवेन्यू ₹0.00 करोड़ रहा है। हालांकि कंपनी ने ₹0.87 करोड़ का नेट प्रॉफिट दिखाया है, लेकिन यह कंपनी के कोर बिजनेस से नहीं आया है। कंपनी ने Punjab National Bank के साथ अपनी ₹150 करोड़ की वर्किंग कैपिटल लिमिट को भी सरेंडर कर दिया है, जो इसकी खराब स्थिति को दर्शाता है।
क्यों घबराए हुए हैं ऑडिटर्स?
ऑडिटर्स की रिपोर्ट में 'Emphasis of Matter' के तहत बड़ी चिताएं जाहिर की गई हैं:
- एसेट कंसंट्रेशन: कंपनी की कुल एसेट्स का 89.99% यानी ₹144.23 करोड़ हिस्सा पार्टनरशिप फर्मों में फंसा हुआ है।
- फंड का डायवर्जन: ऑडिटर्स ने पाया कि एक पार्टनरशिप फर्म ने ₹125.05 करोड़ लोन के तौर पर दूसरी कॉर्पोरेट एंटिटीज को ट्रांसफर कर दिए हैं, जिससे इन पैसों की रिकवरी पर संशय बना हुआ है।
- गोइंग कंसर्न रिस्क: कंपनी के भावनगर डिवीजन के भविष्य और उसके 'गोइंग कंसर्न' (Going-Concern) स्टेटस पर ऑडिटर्स ने साफ तौर पर अनिश्चितता जताई है।
पुरानी समस्याएं और भविष्य का रिस्क
कंपनी फिलहाल पूरी तरह से ऑपरेशनल ठप (Limbo) स्थिति में है। मैनेजमेंट नई बिजनेस अपॉर्चुनिटीज की बात तो कर रहा है, लेकिन पुराने घाव अब भी गहरे हैं। उदाहरण के तौर पर, वित्त वर्ष 2017-18 में एक जॉइंट वेंचर के लिए मिला ₹1.21 करोड़ का एडवांस न तो वापस हुआ है और न ही प्रोजेक्ट शुरू हुआ। इसके अलावा, कंपनी ने पिछले वर्षों के ₹1.31 करोड़ के नॉन-कमिटमेंट चार्जेस को एडजस्ट करने के लिए ओपनिंग बैलेंसेस को फिर से तैयार किया है।
निवेशकों के लिए फिलहाल यह स्टॉक काफी जोखिम भरा दिख रहा है, क्योंकि कंपनी के पास न तो कोई स्पष्ट बिजनेस प्लान है और न ही मुख्य कारोबार से कोई कमाई हो रही है।
