HPL Electric & Power: ₹1,800 करोड़ रेवेन्यू और ₹3,200 करोड़ का ऑर्डर बुक, निवेशकों की बल्ले-बल्ले!

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AuthorMehul Desai|Published at:
HPL Electric & Power: ₹1,800 करोड़ रेवेन्यू और ₹3,200 करोड़ का ऑर्डर बुक, निवेशकों की बल्ले-बल्ले!

HPL Electric & Power ने वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) के लिए **₹1,800 करोड़** का शानदार रेवेन्यू दर्ज किया है। खास बात यह है कि चौथी तिमाही (Q4) में कंपनी का रेवेन्यू **₹500 करोड़** के पार निकल गया। इसके अलावा, कंपनी का ऑर्डर बुक **₹3,200 करोड़** का है।

HPL Electric & Power की दमदार परफॉर्मेंस

HPL Electric & Power ने वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंपनी ने ₹1,800 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू हासिल किया है। कंपनी के लिए यह वित्तीय वर्ष काफी सफल रहा, खासकर चौथी तिमाही (Q4 FY26) में, जब रेवेन्यू पहली बार ₹500 करोड़ के आंकड़े को पार कर गया। कंपनी की कुल ऑर्डर बुक ₹3,200 करोड़ पर पहुंच गई है (22 मई, 2026 तक)।

क्यों है ये अहम?

यह परफॉर्मेंस HPL Electric की 'टू-इंजन' स्ट्रेटेजी की सफलता को दर्शाता है। कंपनी स्मार्ट मीटरिंग के साथ-साथ तेजी से बढ़ते कंज्यूमर एंड इंडस्ट्रियल (C&I) बिजनेस को भी मजबूती दे रही है। मजबूत ऑर्डर बुक भविष्य के लिए रेवेन्यू की स्पष्टता प्रदान करती है, जबकि C&I सेगमेंट से बढ़ती आय कंपनी के रेवेन्यू को डाइवर्सिफाई करती है। स्मार्ट मीटरिंग में एग्जीक्यूशन की दिक्कतों को दूर करने से ऑपरेशनल एफिशिएंसी में भी सुधार के संकेत मिले हैं।

C&I सेगमेंट का जलवा

FY26 में, C&I सेगमेंट का रेवेन्यू ₹784 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 26% की वृद्धि दर्शाता है। इस सेगमेंट ने कंपनी के कुल रेवेन्यू में 43% का योगदान दिया। C&I के भीतर, वायर्स एंड केबल्स (Wires & Cables) डिवीजन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 50% की उछाल के साथ ₹340 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया।

भविष्य की राह

स्मार्ट मीटरिंग में एग्जीक्यूशन की समस्याओं को ठीक करने के बाद, कंपनी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रही है। C&I सेगमेंट को FY27 में ₹1,000 करोड़ के आंकड़े को पार करने का लक्ष्य रखा गया है। FY27 में होने वाला कैपेक्स (Capex) मेंटेनेंस पर केंद्रित रहेगा। कंपनी के नए 'नीराम पल्स' (Neeram Pulse) स्मार्ट वॉटर मीटर से FY27 की दूसरी छमाही में मामूली रेवेन्यू आने की उम्मीद है।

जोखिम जिन पर नजर

मेटल और प्लास्टिक जैसे कच्चे माल की कीमतों में महंगाई के कारण मार्जिन पर दबाव देखा गया। हालांकि कीमतों में बढ़ोतरी की गई है, लेकिन मार्जिन सामान्य होने पर इसका पूरा असर अभी देखना बाकी है। प्रमोटर के शेयरों की गिरवी (Share Pledges) 2.42% तक कम हो गई है, जो एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इस पर नजर बनाए रखना जरूरी है।

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