H.G. Infra Engineering के दूसरी तिमाही के नतीजे मिले-जुले रहे हैं। जहां कंपनी का स्टैंडअलोन मुनाफा गिरकर **₹321.31 मिलियन** रह गया है, वहीं निवेशकों की नजरें कंपनी के खिलाफ चल रही CBI जांच पर टिकी हैं।
मिले-जुले नतीजे और ऑपरेशंस
कंपनी ने सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। स्टैंडअलोन आधार पर कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल के ₹673.06 मिलियन से घटकर ₹321.31 मिलियन रह गया है। हालांकि, कंसोलिडेटेड लेवल पर प्रॉफिट ₹797.61 मिलियन रहा, जो पिछले साल के ₹518.36 मिलियन के मुकाबले बेहतर है। रेवेन्यू की बात करें तो स्टैंडअलोन रेवेन्यू घटकर ₹8,832.19 मिलियन रहा, जबकि कंसोलिडेटेड रेवेन्यू बढ़कर ₹9,735.87 मिलियन पहुंच गया।
क्यों है चिंता?
नतीजों से ज्यादा चर्चा कंपनी पर चल रही कानूनी जांच की है। जनवरी 2026 में CBI और एंटी-करप्शन ब्यूरो ने कंपनी के चार कर्मचारियों को हिरासत में लिया था और CMD के आवास पर तलाशी अभियान चलाया था। हालांकि कंपनी का दावा है कि इसका फाइनेंशियल कामकाज पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है, लेकिन गवर्निंग रिस्क को देखते हुए बाजार सतर्क है।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को दो मुख्य बातों पर नजर रखनी चाहिए:
- CBI जांच का स्टेटस: क्या FIR में कोई नया मोड़ आता है या मैनेजमेंट के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई होती है।
- डाइवेंस्टमेंट प्लान: कंपनी अपनी 5 सब्सिडियरी कंपनियों को बेचने की योजना पर काम कर रही है, विशेषकर खम्मम और रायपुर-विशाखापत्तनम प्रोजेक्ट्स से जुड़ी SPVs का विनिवेश, जो कंपनी की बैलेंस शीट के लिए अहम है।
