गुजरात अपोलो इंडस्ट्रीज के FY26 नतीजे और डिविडेंड
गुजरात अपोलो इंडस्ट्रीज ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपने ऑडिटेड वित्तीय नतीजों की घोषणा की है। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने ₹2 प्रति इक्विटी शेयर के डिविडेंड की सिफारिश की है, जो कि ₹10 के फेस वैल्यू का 20% है।
कंपनी का प्रदर्शन
वित्तीय वर्ष के लिए, कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹31.67 करोड़ रहा, जबकि कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ₹52.98 करोड़ दर्ज किया गया। वहीं, कंपनी ने स्टैंडअलोन आधार पर ₹2.14 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) और कंसॉलिडेटेड आधार पर ₹5.16 करोड़ का PAT कमाया है।
निवेशकों के लिए खास
यह डिविडेंड (Dividend) की सिफारिश शेयरधारकों के लिए सीधे रिटर्न का मौका लेकर आई है। प्रॉफिट के आंकड़े वित्तीय वर्ष में कंपनी के प्रदर्शन को दर्शाते हैं। इसके अलावा, कंपनी को अपने स्टैच्यूटरी ऑडिटर से एक अनमोडिफाइड ऑडिट ओपिनियन (Unmodified Audit Opinion) भी मिला है, जो वित्तीय अवधि के लिए क्लीन फाइनेंशियल हेल्थ का संकेत देता है।
फंड यूटिलाइजेशन पर भी अपडेट
कंपनी ने हाल ही में 13 अक्टूबर, 2025 को एक प्रेफरेंशियल इश्यू (Preferential Issue) के जरिए फंड जुटाया था। हालिया फाइलिंग में इस फंड के इस्तेमाल का भी अपडेट दिया गया है, जिसमें विस्तार (expansion), वर्किंग कैपिटल, कैपिटल एक्सपेंडिचर (capital expenditure) और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए मूल आवंटन योजनाओं से हुए विचलन (deviations) पर प्रकाश डाला गया है।
आगे क्या?
डिविडेंड की सिफारिश को आगामी एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद ही अंतिम रूप दिया जाएगा। कंपनी को प्रेफरेंशियल इश्यू से जुटाई गई राशि के उपयोग में हुए विचलन के लिए स्पष्टीकरण और औचित्य प्रदान करना होगा। इसके साथ ही, M/s. S.K Moondra & Co. को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आंतरिक ऑडिटर (Internal Auditor) नियुक्त किया गया है।
ध्यान देने योग्य जोखिम
निवेशकों को प्रेफरेंशियल इश्यू से फंड के उपयोग में हुए विचलन के संबंध में कंपनी के स्पष्टीकरण और मैनेजमेंट की रणनीति पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। फंड का पारदर्शी और कुशल आवंटनsustained growth और निवेशक के विश्वास के लिए महत्वपूर्ण है। बिना स्पष्ट औचित्य के महत्वपूर्ण विचलन चिंताएं बढ़ा सकते हैं।
