Greenpanel Industries ने Q2 FY27 के नतीजे पेश किए हैं, जिसमें कंपनी का रेवेन्यू **4.6%** बढ़कर **₹407 करोड़** पर पहुंच गया है। हालांकि, रिटेल सेल्स में रिकॉर्ड बढ़त के बावजूद, कॉम्पिटिशन और हाई इन्वेंट्री कॉस्ट के कारण कंपनी के मार्जिन पर काफी दबाव देखा गया है।
क्या रहा नतीजों का हाल?
Greenpanel Industries ने चालू फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू के तौर पर ₹407 करोड़ का आंकड़ा छुआ है। यह सालाना आधार पर 4.6% की ग्रोथ है, जबकि पिछली तिमाही के मुकाबले कंपनी ने 16.4% की शानदार छलांग लगाई है। हालांकि, मुनाफे की बात करें तो EBITDA मार्जिन गिरकर 7.5% रह गया है, जो पिछली तिमाही में 9.6% और पिछले साल की समान अवधि में 10.2% था।
मार्जिन पर दबाव क्यों?
कंपनी के मैनेजमेंट के मुताबिक, मार्जिन कम होने के पीछे दो बड़े कारण हैं:
- इन्वेंट्री का असर: Q1 से बची हुई महंगी इन्वेंट्री को क्लियर करने के कारण मुनाफा प्रभावित हुआ।
- एग्रेसिव प्राइसिंग: मार्केट शेयर को बचाने के लिए कंपनी को आक्रामक कीमतें रखनी पड़ीं, जिसने मुनाफे की मार्जिन को सिकोड़ दिया है।
OEM सेगमेंट में चुनौती
कंपनी अपने OEM सेगमेंट में बड़े बदलावों से गुजर रही है। H1 FY27 में घरेलू वॉल्यूम शेयर गिरकर 15% पर आ गया है, जो पहले 25%-30% के बीच रहता था। दरअसल, Q1 में प्राइस बढ़ाने के फैसले के बाद कई क्लाइंट्स इंपोर्ट की ओर शिफ्ट हो गए थे। अब कंपनी अपनी प्राइसिंग को दोबारा सेट कर रही है ताकि खोया हुआ मार्केट वापस पाया जा सके।
आगे की राह और रिस्क
कंपनी के लिए आने वाले समय में चुनौतियां कम नहीं हैं। इंडस्ट्री में ओवर-सप्लाई की स्थिति बनी हुई है, जो अगले दो साल तक जारी रह सकती है। इसके अलावा, फ्रेट कॉस्ट और कंटेनर की कमी जैसे लॉजिस्टिकल मुद्दों ने मिडिल ईस्ट के एक्सपोर्ट पर असर डाला है।
फिलहाल, कंपनी का कैपेसिटी यूटिलाइजेशन 50%-55% के स्तर पर है। मैनेजमेंट ने भविष्य के लिए 15%-17% CAGR वॉल्यूम ग्रोथ का लक्ष्य रखा है, और निवेशकों की नजरें इस बात पर होंगी कि कंपनी कब तक अपने मार्जिन को वापस डबल-डिजिट में ला पाती है।
