सितंबर तिमाही में Greenlam Industries का नेट प्रॉफिट **23%** गिरकर **₹24.5 करोड़** पर आ गया है। हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू **8.3%** बढ़ा है, लेकिन बढ़ती फ्रेट कॉस्ट और जियोपॉलिटिकल तनाव ने मुनाफे पर भारी दबाव बनाया है। राहत की बात यह है कि चिपबोर्ड सेगमेंट में **124%** की शानदार उछाल देखी गई है।
Q2 FY27 नतीजों की मुख्य बातें
कंपनी ने सितंबर तिमाही में ₹875.2 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो सालाना आधार पर 8.3% की बढ़त दर्शाता है। वहीं, नेट प्रॉफिट 22.9% गिरकर ₹24.5 करोड़ रहा।
इन्वेस्टर टेकअवे: कंपनी का कोर लैमिनेट बिजनेस वॉल्यूम के मामले में सुस्त है, लेकिन नया चिपबोर्ड बिजनेस कंपनी के लिए एक बड़ा सहारा बनकर उभर रहा है।
मार्जिन पर क्यों है दबाव?
कंपनी के EBITDA मार्जिन में 330 bps की बड़ी गिरावट आई है, जिससे यह 9.9% पर सिमट गया है। इसकी मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता है, जिसके कारण लॉजिस्टिक्स बिगड़े हैं और फ्रेट कॉस्ट (Freight Costs) में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी कंपनी के ऑपरेशनल मुनाफे को चोट पहुंचाई है।
नई उम्मीदें: चिपबोर्ड और कैपेसिटी एक्सपेंशन
Greenlam अब लैमिनेट्स पर निर्भरता कम करने के लिए तेजी से डाइवर्सिफाई कर रही है। चिपबोर्ड बिजनेस ने ₹8.7 करोड़ का EBITDA (प्री-फॉरेक्स) हासिल कर एक बड़ा मील का पत्थर पार कर लिया है। कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। आंध्र प्रदेश के नायडूपेटा (Naidupeta) प्लांट में 20 लाख अतिरिक्त शीट की क्षमता जोड़ी जा रही है, जिसका कमर्शियल प्रोडक्शन Q4 FY27 तक शुरू होने की उम्मीद है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों को अब यह देखना होगा कि कंपनी बढ़ती फ्रेट कॉस्ट को ग्राहकों पर कितना और कब तक डाल पाती है। यदि जियोपॉलिटिकल तनाव जारी रहता है, तो मार्जिन पर दबाव अगले दो क्वार्टर तक बना रह सकता है। अब बाजार की नजरें नायडूपेटा प्लांट के विस्तार और चिपबोर्ड सेगमेंट की ग्रोथ पर टिकी होंगी।
