Gravita India ने अगले तीन सालों के लिए 35% की कमाई CAGR का लक्ष्य रखा है और अपने CAPEX को बढ़ाया है। वहीं, RVNL, Power Mech Projects और Bharat Forge ने बड़े नए कॉन्ट्रैक्ट्स का ऐलान किया है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में मजबूत एक्टिविटी का संकेत दे रहा है।
Gravita India का बड़ा प्लान: 35% तक बढ़ सकती है कमाई
Gravita India ने अगले तीन सालों के लिए 20-25% वॉल्यूम CAGR और 35% कमाई CAGR का बड़ा लक्ष्य रखा है। कंपनी ने अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX) को FY29 तक बढ़ाकर ₹1,700 करोड़ कर दिया है, जिसमें कॉपर रीसाइक्लिंग पर खास फोकस रहेगा।
इंफ्रा कंपनियों को मिले बम्पर ऑर्डर
इसी के साथ, कई इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल कंपनियों ने बड़े नए ऑर्डर हासिल किए हैं। Rail Vikas Nigam (RVNL) को NMDC से ₹2,977 करोड़ का ऑर्डर मिला है। Power Mech Projects ने JSW Thermal Energy से ₹1,009 करोड़ का प्रोजेक्ट जीता है। वहीं, Bharat Forge ने डिफेंस मिनिस्ट्री के साथ ₹425 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है।
क्यों है ये खबर अहम?
Gravita India के ये ग्रोथ टारगेट्स कंपनी के बिजनेस मॉडल और बाजार की मांग में भरोसा दिखाते हैं। अगर कंपनी इन लक्ष्यों को हासिल कर पाती है, तो शेयरधारकों के लिए यह काफी फायदेमंद हो सकता है। RVNL, Power Mech, और Bharat Forge के लिए ये नए ऑर्डर उनके ऑर्डर बुक को मजबूत करेंगे और भविष्य के रेवेन्यू की अच्छी तस्वीर पेश करेंगे। इन ऑर्डरों की झड़ी भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल सेक्टर में चल रही ज़बरदस्त एक्टिविटी की ओर इशारा कर रही है।
बाजार की स्थिति
फिलहाल, भारतीय बाजार कंसॉलिडेशन फेज में है, जहाँ Sensex 76,803 और Nifty 24,013 के स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं। 19 जून 2026 तक FIIs ने ₹4,859 करोड़ का नेट इनफ्लो किया, जबकि DIIs ने ₹1,159 करोड़ का नेट आउटफ्लो दर्ज किया। City Gas Distribution (CGD) सेक्टर के लिए मार्च 2026 में आए रेगुलेटरी बदलावों ने ग्रोथ की राह आसान की है।
आगे क्या?
निवेशक Gravita India के ग्रोथ टारगेट्स और CAPEX के प्रभावी इस्तेमाल पर नजर रखेंगे। RVNL, Power Mech, और Bharat Forge को मिले नए ऑर्डरों का प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और रेवेन्यू में तब्दील होना महत्वपूर्ण होगा। Mahanagar Gas के मार्जिन रिकवरी पर भी नजर रहेगी।
जोखिम
Gravita India और Mahanagar Gas को कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन में रुकावटों से मार्जिन पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है। बड़ी CAPEX योजनाओं और लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स को पूरा करने में एग्जीक्यूशन रिस्क भी शामिल हैं, जो व्यापक आर्थिक कारकों से प्रभावित हो सकते हैं।
