Garware Marine Industries के लिए फाइनेंशियल ईयर 2026 काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। कंपनी का नेट प्रॉफिट **65.88%** घटकर महज **₹14.72 लाख** रह गया है, साथ ही कंपनी कानूनी विवादों और ऑडिट से जुड़ी दिक्कतों से जूझ रही है।
मुनाफे पर दबाव और खराब नतीजे
कंपनी के ऑपरेशनल रेवेन्यू में भी गिरावट देखी गई है, जो पिछले साल के ₹120.42 लाख से घटकर ₹112.55 लाख रह गया है। वहीं, नेट प्रॉफिट पिछले साल के ₹43.14 लाख के मुकाबले फिसलकर ₹14.72 लाख पर आ गया है। इसके अलावा, इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो की वैल्यू गिरने से कंपनी को ₹759.91 लाख का बड़ा कॉम्प्रिहेंसिव लॉस हुआ है।
ऑडिटर्स और कानूनी विवाद
कंपनी की मुसीबतें केवल नतीजों तक सीमित नहीं हैं। स्टैच्यूटरी ऑडिटर्स ने ₹3.56 करोड़ के ट्रेड रिसीवेबल्स को लेकर सवाल उठाए हैं, जिसे वे बैड डेट (Bad Debt) के रूप में प्रोविजन न करने पर 'क्वालिफाइड ओपिनियन' दे रहे हैं। इसके साथ ही, चेन्नई की EOW (Economic Offences Wing) और Integrated Finance Company Limited (IFCL) के बीच चल रहा विवाद अब मद्रास हाई कोर्ट के दरवाजे पर है।
निवेशकों के लिए जोखिम
कंपनी ने कैश बचाने के लिए इस साल किसी भी तरह के डिविडेंड की घोषणा नहीं की है। इसके अतिरिक्त, Garware Offshore Services Limited पर अत्यधिक निर्भरता (Concentration Risk) भी कंपनी की स्थिरता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। अनुपालन में देरी के चलते कंपनी को ₹62,000 का जुर्माना भी भरना पड़ा है। फिलहाल, निवेशकों को कोर्ट के फैसले और बकाया रिकवरी पर नजर रखने की सलाह दी जाती है।
