GVK Power & Infrastructure इस वक्त गहरे वित्तीय संकट में है और कंपनी के खिलाफ इंसॉल्वेंसी (CIRP) की प्रक्रिया चल रही है। कंपनी को फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में **₹1,382.69 करोड़** का भारी नेट लॉस हुआ है, जबकि उसकी ऑपरेशनल इनकम में **90%** की बड़ी गिरावट आई है।
भारी नुकसान और घटती कमाई
कंपनी के हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसकी ऑपरेशनल इनकम गिरकर मात्र ₹80.53 करोड़ रह गई है। कंपनी की आय का अब सिर्फ एक ही जरिया बचा है— 330 MW की अलकनंदा हाइड्रो पावर कंपनी। पिछले फाइनेंशियल ईयर के मुनाफे के मुकाबले इस साल का ₹1,382.69 करोड़ का नेट लॉस कंपनी की खराब माली हालत को बयां करता है।
बोर्ड में खालीपन और ऑडिटर्स की चेतावनी
सिर्फ नुकसान ही नहीं, कंपनी गवर्नेंस के मोर्चे पर भी पूरी तरह लड़खड़ा गई है। 3 अक्टूबर, 2024 को कंपनी के सभी इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं, कंपनी के स्टेट्यूटरी ऑडिटर्स (M/s T R Chadha & Co LLP) ने फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर अपना 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' जारी किया है। उन्होंने कंपनी के 'गोइंग कंसर्न' बने रहने पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और सिंगापुर स्थित GVK कोल डेवलपर्स से जुड़ी देनदारियों को लेकर बड़ी अनिश्चितता जताई है।
आगे क्या होगा?
कंपनी अभी NCLT, हैदराबाद द्वारा शुरू की गई कॉरपोरेट इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत है। अब कंपनी के तमाम अधिकार रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) सतीश कुमार गुप्ता के पास हैं। मौजूदा स्थिति में कंपनी की कोई भी स्टेट्यूटरी कमिटी काम नहीं कर रही है और रिजॉल्यूशन प्रोसेस ही तय करेगा कि कंपनी के बचे हुए एसेट्स और लायबिलिटीज का भविष्य क्या होगा।
