GTL Ltd ने FY26 में **₹582.54 करोड़** का नेट प्रॉफिट दिखाया है। लेकिन चौंकिए मत, यह कमाई बिजनेस से नहीं बल्कि कर्ज निपटान (Debt Settlement) के अकाउंटिंग गेन से आई है। कंपनी पर अभी भी अस्तित्व का संकट बरकरार है।
मुनाफे के पीछे का सच
कंपनी ने जो ₹582.54 करोड़ का प्रॉफिट पेश किया है, वह उसके कोर बिजनेस से नहीं आया है। कंपनी को ₹610.44 करोड़ की एक्सेप्शनल इनकम हुई है, जो 'वन-टाइम सेटलमेंट' (OTS) के कारण मिली है। वहीं, दूसरी तरफ कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू साल-दर-साल 11.6% घटकर महज ₹224.37 करोड़ पर आ गया है।
ऑडिटर्स ने दी चेतावनी
बैलेंस शीट पर मुनाफा जरूर दिख रहा है, लेकिन ऑडिटर्स ने 'Qualified Opinion' जारी करते हुए 'मटेरियल अनिश्चितता' जताई है। कंपनी की नेटवर्थ अभी भी नेगेटिव ₹5,446.05 करोड़ है। इसका मतलब है कि कंपनी की कुल देनदारियां उसकी एसेट से कहीं ज्यादा हैं।
निवेशकों के लिए बड़े रिस्क
- गोइंग कंसर्न रिस्क: ऑडिटर्स को संदेह है कि क्या कंपनी भविष्य में लंबे समय तक अपना काम जारी रख पाएगी।
- भारी कर्ज: भले ही कुल उधार घटकर ₹3,267.34 करोड़ रह गया हो, लेकिन ₹4,516.18 करोड़ की आकस्मिक देनदारियां (Contingent Liabilities) बैलेंस शीट पर बड़ा बोझ बनी हुई हैं।
- इंडस्ट्री दबाव: टेलीकॉम सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच GTL का कारोबार मुख्य रूप से GTL Infrastructure Limited पर ही निर्भर है, जो खुद वित्तीय चुनौतियों से जूझ रही है।
