GE Power India अपनी Durgapur यूनिट को JSW Energy को डीमर्ज (Demerge) करने जा रही है। इस कदम से कंपनी अपने मुख्य कामों पर ध्यान केंद्रित करेगी और मुनाफे में सुधार लाएगी। साथ ही, कंपनी की क्रेडिट रेटिंग को BBB+(Stable) तक अपग्रेड किया गया है।
GE Power India में बड़े पुनर्गठन का ऐलान
GE Power India Limited (GEPIL) ने एक बड़े रणनीतिक कदम के तहत अपनी Durgapur यूनिट को JSW Energy Limited को डीमर्ज करने का प्रस्ताव दिया है। इस सौदे के तहत, शेयरधारकों को GE Power India के हर 139 शेयरों के बदले JSW Energy के 10 शेयर मिलेंगे। इसी के साथ, कंपनी की क्रेडिट रेटिंग को 'BBB+(Stable)' तक बढ़ाया गया है।
क्यों है यह अहम?
इस पुनर्गठन का मुख्य मकसद कंपनी को कम मुनाफा देने वाली संपत्तियों से मुक्त कर, ज्यादा मार्जिन वाली मुख्य सेवाओं ('Core Services') पर ध्यान केंद्रित करके मुनाफा बढ़ाना है। पिछले तीन सालों में कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में जबरदस्त सुधार देखा गया है, जिसमें कर्ज में बड़ी कमी और लिक्विडिटी (Liquidity) व EBITDA में सकारात्मक बदलाव शामिल हैं।
पृष्ठभूमि
पिछले तीन सालों में, GE Power India ने वित्तीय मोर्चे पर एक मजबूत वापसी की है। मार्च 2023 में जहां कंपनी पर ₹1,956 करोड़ का बॉन्ड कर्ज था, वहीं मार्च 2026 तक यह घटकर ₹764 करोड़ रह जाने का अनुमान है। कंपनी का बैंक बैलेंस ₹66 करोड़ के घाटे से सुधरकर ₹880 करोड़ के सरप्लस में आ गया है। EBITDA भी पहले के नुकसान के बाद FY 2026 में ₹277 करोड़ दर्ज किया गया है।
अब क्या बदलेगा?
कंपनी अब पूरी तरह से अपनी 'मुख्य सेवाओं' वाले कारोबार पर ध्यान केंद्रित करेगी, जिसका ऑर्डर बुक FY 2021-22 में ₹299 करोड़ से बढ़कर FY 2025-26 में ₹734 करोड़ हो गया है। मैनेजमेंट का कहना है कि मुख्य सेवाओं के लिए मैन्युफैक्चरिंग और फैब्रिकेशन का सपोर्ट जारी रहेगा, जिसके लिए JSW Energy के साथ 5 साल का मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज एग्रीमेंट किया गया है।
जोखिम क्या हैं?
यह डीमर्जर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मंजूरी पर निर्भर है, जिससे इसके अमल में आने का जोखिम बना हुआ है। निवेशकों को JSW Energy के साथ हुए मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज एग्रीमेंट की प्रभावशीलता पर भी नजर रखनी होगी ताकि मुख्य कारोबार के संचालन में कोई बाधा न आए।
मुख्य वित्तीय आंकड़े (समय-सीमा के साथ):
- नेट वर्थ (Net Worth): मार्च '23 में ₹227 करोड़ से बढ़कर मार्च '26 तक ₹483 करोड़।
- बैंक बैलेंस: मार्च '23 में ₹-66 करोड़ से सुधरकर मार्च '26 तक ₹880 करोड़।
- आउटस्टैंडिंग बॉन्ड: मार्च '23 में ₹1,956 करोड़ से घटकर मार्च '26 तक ₹764 करोड़।
- मुख्य सेवाओं का ऑर्डर बुक: FY 21-22 में ₹299 करोड़ से बढ़कर FY 25-26 में ₹734 करोड़।
- Durgapur यूनिट का घाटा: 2023-2025 के दौरान औसतन ₹27 करोड़ सालाना।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को डीमर्जर के लिए NCLT की मंजूरी, नई संरचना के तहत संचालन का सफल एकीकरण और मुख्य सेवाओं के ऑर्डर बुक में निरंतर वृद्धि पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
