Facor Alloys ने Q2 FY27 के लिए निराशाजनक नतीजे पेश किए हैं। कंपनी को **₹3.49 करोड़** का स्टैंडअलोन नेट लॉस हुआ है, और ऑडिटर ने विदेशी सब्सिडियरी के आंकड़ों के अभाव में कंसोलिडेटेड नतीजों पर अपनी सहमति देने से इनकार कर दिया है।
मुनाफे के पीछे का सच
दिखने में कंपनी का हाफ-इयर नेट प्रॉफिट ₹18.57 करोड़ लग रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि यह कमाई ऑपरेशंस से नहीं, बल्कि एसेट बेचने से आई है। कंपनी को फिक्स्ड एसेट्स की बिक्री से ₹31.91 करोड़ का वन-टाइम गेन हुआ है। असलियत यह है कि कंपनी के प्लांट 31 अक्टूबर 2023 से बंद पड़े हैं, जिससे कोर मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस पूरी तरह ठप है।
ऑडिटर की चेतावनी
इस रिपोर्ट में सबसे बड़ा 'रेड फ्लैग' ऑडिटर की डिस्क्लेमर टिप्पणी है। ऑडिटर ने साफ कहा है कि विदेशी सब्सिडियरी के फाइनेंशियल स्टेटमेंट न मिल पाने के कारण वे कंसोलिडेटेड नतीजों पर कोई राय नहीं दे सकते। साथ ही, कंपनी की विदेशी सब्सिडियरी के खिलाफ 'इकोनॉमिक ऑफेंस विंग' (EOW) की जांच भी चल रही है, जो निवेशकों के लिए बड़ा रिस्क है।
अब आगे क्या?
कंपनी अब मैन्युफैक्चरिंग को छोड़कर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की ओर रुख कर रही है। मैनेजमेंट की योजना अपनी बची हुई एसेट्स को प्राइवेट रेलवे साइडिंग और गुड्स हैंडलिंग टर्मिनल्स में बदलने की है, ताकि PM GatiShakti प्रोजेक्ट्स का फायदा लिया जा सके। हालांकि, क्या ये प्रोजेक्ट्स मैन्युफैक्चरिंग से हुए नुकसान की भरपाई कर पाएंगे, यह देखना अभी बाकी है।
