Ecoboard Industries ने कच्चे माल की कमी और लगातार घाटे के चलते अपनी 'पार्टिकल बोर्ड बिल्ड' डिवीजन को एक साल के लिए बंद कर दिया है। यह डिवीजन कंपनी के कुल टर्नओवर में **64%** से ज्यादा का योगदान देती थी। साथ ही, कंपनी ने बड़ा बदलाव करते हुए वेंकटरामन कृष्णमूर्ति को नया CEO नियुक्त किया है।
क्या है कंपनी का बड़ा फैसला?
Ecoboard Industries ने अपने सबसे बड़े बिज़नेस यूनिट 'पार्टिकल बोर्ड बिल्ड' (Eco Build) के कामकाज को तत्काल प्रभाव से 1 साल के लिए सस्पेंड कर दिया है। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने इस पर औपचारिक मुहर लगा दी है। कंपनी में नेतृत्व भी बदला गया है, जहाँ रामा कृष्णा राजू गोट्टुमक्कल अब CEO का पद छोड़कर मैनेजिंग डायरेक्टर बने रहेंगे, जबकि मैन्युफैक्चरिंग और रीस्ट्रक्चरिंग के एक्सपर्ट वेंकटरामन कृष्णमूर्ति नए CEO की कमान संभालेंगे।
क्यों बंद हुआ प्लांट?
यह निर्णय कंपनी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि बंद की गई यूनिट का टर्नओवर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹15.33 करोड़ रहा था, जो कंपनी की कुल आय का 64.14% हिस्सा है। कच्चे माल की भारी कमी और लगातार हो रहे ऑपरेटिंग लॉस के कारण यह यूनिट घाटे का सौदा बन गई थी। कंपनी के मुताबिक, भारी निवेश के बाद भी भविष्य में इस प्लांट से मुनाफे की गारंटी नहीं थी, इसलिए यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।
अब आगे क्या होगा?
कंपनी अब अपना पूरा ध्यान अपने 'एनर्जी डिवीजन' (Eco Energy) पर लगा रही है। यह यूनिट इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्रोजेक्ट्स पर काम करती है। कंपनी इसी सेगमेंट के जरिए अपनी भविष्य की ग्रोथ देख रही है।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risks for Investors)
अल्पकालिक तौर पर निवेशकों के सामने रेवेन्यू का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। कंपनी की दो-तिहाई कमाई वाली यूनिट बंद होने से अब सारा दारोमदार एनर्जी डिवीजन के तेजी से बढ़ने पर टिका है। अगले कुछ महीनों में स्टॉक में उतार-चढ़ाव (Volatility) बने रहने की पूरी संभावना है। अब नजरें इस पर रहेंगी कि एनर्जी डिवीजन का ऑर्डर बुक कितना तेजी से बढ़ता है और एक साल बाद बंद पड़ी यूनिट के साथ क्या किया जाता है।
