Ecoboard Industries ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं, जिसमें कंपनी का रेवेन्यू **88%** बढ़कर **₹23.9 करोड़** हो गया है। कंपनी ने अपने वेलापुर प्लांट में नई प्रोडक्शन लाइन शुरू की है, लेकिन कानूनी और टैक्स संबंधी मामले निवेशकों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
ऑपरेशनल टर्नअराउंड की ओर बढ़ते कदम
कंपनी के हालिया एनुअल रिपोर्ट के मुताबिक, रेवेन्यू में 87.97% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो ₹2,390.53 लाख पर पहुंच गया है। घाटे की बात करें तो, कंपनी ने अपना नेट लॉस घटाकर ₹1,008.38 लाख कर लिया है, जबकि पिछले साल यह ₹1,828.32 लाख था। कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए प्रेफरेंशियल शेयर इश्यू भी पूरा किया है।
कैपेसिटी विस्तार और 'EcoEnergy' का दबदबा
वेलापुर फैसिलिटी में नई 8x4 प्रोडक्शन लाइन अब 65% कैपेसिटी पर काम कर रही है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही तक यह 95% तक पहुंच जाएगी। कंपनी का 'EcoEnergy' डिवीजन भी बायो-CNG और वेस्ट-टू-एनर्जी सॉल्यूशंस की बढ़ती मांग का फायदा उठा रहा है।
AGM और कॉर्पोरेट ट्रांजैक्शन
कंपनी ने अपनी 35वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) 30 सितंबर, 2026 को तय की है। शेयरहोल्डर्स Western Bio Systems India Private Limited के साथ ₹8 करोड़ तक के ट्रांजैक्शन पर वोट करेंगे, जिसमें ₹3 करोड़ का ट्रेड और ₹5 करोड़ का इंटर-कॉर्पोरेट डिपॉजिट शामिल है।
निवेशकों के लिए जोखिम और चेतावनी
निवेशकों को कानूनी चुनौतियों पर नजर रखनी चाहिए। कंपनी पर ₹1,114.64 लाख की एक्साइज ड्यूटी की मांग लंबित है जो सुप्रीम कोर्ट में है, साथ ही ₹690 लाख की अन्य टैक्स मांगें भी बरकरार हैं। इसके अलावा, वित्तीय खुलासों में देरी के कारण BSE को जुर्माना भी भरना पड़ा है।
आगे की राह
अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि कंपनी अपने वेलापुर प्लांट के लिए 95% यूटिलाइजेशन का लक्ष्य कैसे हासिल करती है और 'EcoBuild' पोर्टफोलियो, जैसे कि पैलेट्स और हीट लॉग्स, रेवेन्यू में कितनी निरंतरता ला पाते हैं।
