Eco Recycling लिमिटेड के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। कंपनी ने ₹1 प्रति शेयर (10%) के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है। साथ ही, कंपनी ने अपने प्रमोटर को ₹411 प्रति वारंट की दर से 3,00,000 वारंट जारी करने की भी मंजूरी दे दी है।
बोर्ड मीटिंग में हुए अहम फैसले
Eco Recycling के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने हाल ही में हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। शेयरधारकों की मंजूरी के बाद, कंपनी 32वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में ₹1 प्रति इक्विटी शेयर का फाइनल डिविडेंड (10%) देगी। इस डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 18 सितंबर, 2026 तय की गई है।
इसके अलावा, बोर्ड ने प्रमोटर को 3,00,000 वारंट जारी करने को भी मंजूरी दी है। ये वारंट ₹411 प्रति वारंट की कीमत पर जारी किए जाएंगे और पूरी पेमेंट पर इन्हें इक्विटी शेयर में बदला जा सकेगा।
कंपनी की कमाई और प्रदर्शन
वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही (30 जून, 2026 को समाप्त) के नतीजों के मुताबिक, Eco Recycling ने स्टैंडअलोन आधार पर ₹16.19 करोड़ का रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स दर्ज किया, जबकि मुनाफा ₹6.87 करोड़ रहा। कंसोलिडेटेड आधार पर भी रेवेन्यू ₹16.19 करोड़ रहा, लेकिन मुनाफा बढ़कर ₹9.17 करोड़ हो गया। स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड दोनों आधार पर बेसिक और डाइल्यूटेड ईपीएस (Earnings Per Share) क्रमशः ₹3.56 और ₹4.49 दर्ज किया गया।
नए ऑडिटर की नियुक्ति
कंपनी ने M/s J R Kaanase & Associates को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नया इंटरनल ऑडिटर भी नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 30 जून, 2026 से प्रभावी होगी। इससे पहले M/s. L J Kothari & Co. ने इस्तीफा दे दिया था।
क्यों अहम हैं ये फैसले?
शेयरधारकों के लिए डिविडेंड का ऐलान एक सकारात्मक संकेत है, जो उन्हें कंपनी के मुनाफे में हिस्सेदारी देता है। वहीं, प्रमोटर को वारंट जारी करने से कंपनी को अतिरिक्त पूंजी मिलने की उम्मीद है और इससे प्रमोटर की हिस्सेदारी भी बढ़ सकती है, जिसे बाजार अक्सर अच्छी नजरों से देखता है।
कंपनी की एक बड़ी खासियत यह है कि वह फाइनेंशियल बोरिंग्स (ब्याज वाले कर्ज) से मुक्त होकर काम करती है। कंपनी पर केवल लीज लायबिलिटीज से जुड़े फाइनेंस कॉस्ट का बोझ है, जो इसकी मजबूत बैलेंस शीट को दर्शाता है।
कंसोलिडेटेड मुनाफा, स्टैंडअलोन मुनाफे से ज्यादा होने का कारण इसकी सहायक कंपनी, Ecoreco Park Private Limited का योगदान है।
कंपनी का बैकग्राउंड
Eco Recycling मुख्य रूप से ई-वेस्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में काम करती है। कंपनी हमेशा से कर्ज-मुक्त वित्तीय ढांचा बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करती रही है।
आगे क्या?
शेयरधारकों को आगामी AGM में डिविडेंड पर मुहर लगानी होगी। प्रमोटर के पास वारंट को इक्विटी में बदलने का विकल्प होगा, जिससे कंपनी में नई इक्विटी आएगी। नए इंटरनल ऑडिटर वित्तीय वर्ष के लिए अपना काम शुरू करेंगे।
जोखिम
निवेशकों को डिविडेंड की मंजूरी और वारंट कन्वर्जन की सफलता पर नजर रखनी चाहिए। सहायक कंपनियों का प्रदर्शन भी कंसोलिडेटेड नतीजों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
