EPACK Durable ने Q1 FY27 के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का रेवेन्यू जहां **33.7%** बढ़कर **₹886 करोड़** हो गया, वहीं नेट प्रॉफिट में **48.3%** की भारी गिरावट आई है और यह **₹11.8 करोड़** पर आ गया। इस गिरावट की मुख्य वजह ऑडिटर्स की एक रिपोर्ट है।
EPACK Durable के नतीजे: रेवेन्यू में उछाल, पर मुनाफे पर लगी लगाम
EPACK Durable ने जून 2026 में खत्म हुई तिमाही के लिए अपने कंसोलिडेटेड नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल की समान अवधि के ₹662.39 करोड़ की तुलना में 33.7% बढ़कर ₹886.02 करोड़ दर्ज किया गया। लेकिन, कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में 48.3% की भारी गिरावट आई, जो पिछले साल की तिमाही के ₹22.89 करोड़ से घटकर ₹11.82 करोड़ रह गया।
क्या है गिरावट की वजह?
इस तिमाही के नतीजों में सबसे चिंताजनक बात यह है कि कंपनी के स्टैच्यूटरी ऑडिटर्स ने फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर एक 'क्वालिफाइड ओपिनियन' (Qualified Opinion) दिया है। यह राय ₹19.61 करोड़ के विवादित ट्रेड रिसीवेबल (Trade Receivable) यानी देनदारों के चलते आई है। ऑडिटर्स इस रकम की रिकवरी की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त सबूत हासिल नहीं कर सके, जिससे कंपनी की एसेट वैल्यूएशन (Asset Valuation) और प्रॉफिट पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
PLI इनकम का रिवर्सल और अन्य फैक्टर
इस तिमाही में कंपनी ने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत कोई भी इनकम दर्ज नहीं की है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कंपनी FY 2025-26 के लिए इंक्रीमेंटल सेल्स थ्रेशोल्ड (Incremental Sales Threshold) को पूरा नहीं कर पाई। इसके चलते, पहले से दर्ज की गई PLI इनकम को भी रिवर्स (Reverse) करना पड़ा, जिसने नेट प्रॉफिट पर और दबाव डाला। हालांकि, राजस्थान इन्वेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम (RIPS) के तहत ₹1.84 करोड़ की इंसेंटिव इनकम दर्ज की गई है।
निवेशकों के लिए बड़ा जोखिम
ऑडिटर्स की यह रिपोर्ट कंपनी के लिए एक बड़ा जोखिम (Risk) पैदा करती है। ₹19.61 करोड़ का विवादित देनदारी का मामला अगर अनसुलझा रहता है, तो यह कंपनी की वित्तीय सेहत पर असर डाल सकता है। इसके अलावा, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (Consumer Durables) बिजनेस की अपनी मौसमी प्रकृति (Seasonality) और सरकारी इंसेंटिव स्कीम्स पर निर्भरता भी कंपनी के लिए अतिरिक्त जोखिम पैदा करती है।
आगे क्या उम्मीद करें?
निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि कंपनी इस विवादित देनदारी के मामले को कैसे सुलझाती है और इसका भविष्य के मुनाफे पर क्या असर पड़ता है। आने वाली तिमाहियों में कंपनी का प्रदर्शन, खासकर रेवेन्यू ग्रोथ और विवादित रकम की सफल रिकवरी, महत्वपूर्ण होगी। कंपनी ने Ernst & Young LLP को FY 2026-27 के लिए इंटरनल ऑडिटर (Internal Auditor) के तौर पर फिर से नियुक्त करने की मंजूरी भी दे दी है।
