Dutron Polymers ने FY26 के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने **₹2.70 करोड़** का नेट प्रॉफिट कमाया है और **₹1.50** प्रति शेयर डिविडेंड की सिफारिश की है। हालांकि, कानूनी विवादों के कारण निवेशकों के लिए चुनौतियां बरकरार हैं।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस की झलक
कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए अपने नतीजे पेश किए हैं। इस दौरान कंपनी का टोटल सेल्स रेवेन्यू ₹92.51 करोड़ रहा, जबकि नेट प्रॉफिट ₹2.70 करोड़ दर्ज किया गया। पिछले साल कंपनी का मुनाफा ₹2.72 करोड़ था, यानी इसमें मामूली गिरावट आई है। बोर्ड ने ₹10 फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर ₹1.50 का डिविडेंड देने की सिफारिश की है, जो AGM में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी के अधीन है।
क्यों दबाव में है बिजनेस?
कंपनी का कारोबार सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर निर्भर है, जिसमें इस बार सुस्ती देखी गई है। Jal Jeevan Mission और Gujarat Water Supply & Sewerage Board की ओर से खर्च में कटौती का सीधा असर कंपनी के HDPE पाइप बिजनेस पर पड़ा है।
कानूनी और रेगुलेटरी रिस्क
निवेशकों को दो बड़े जोखिमों पर नजर रखनी चाहिए:
NCLT विवाद: कंपनी फिलहाल NCLT अहमदाबाद बेंच में कानूनी कार्यवाही का सामना कर रही है। सुदीप बी. पटेल और अन्य द्वारा दायर याचिका के कारण, FY 2023-24 का डिविडेंड अभी भी अटका हुआ है और जब तक कानूनी अड़चनें दूर नहीं होतीं, यह पैसा शेयरहोल्डर्स तक नहीं पहुंच पाएगा।
अनुपालन (Compliance) में चूक: कंपनी को BSE की ओर से पेनल्टी का सामना करना पड़ा है। इसका मुख्य कारण सेक्रेटेरियल कंप्लायंस रिपोर्ट और वोटिंग रिजल्ट्स फाइल करने में देरी है। साथ ही, प्रमोटरों के शेयर फिजिकल फॉर्म में होने के कारण SEBI (LODR) नियमों के उल्लंघन का मुद्दा भी बना हुआ है।
मैनेजमेंट ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में रेवेन्यू ग्रोथ को लेकर उम्मीद जताई है, लेकिन यह पूरी तरह से सरकारी प्रोजेक्ट्स की रफ्तार पर निर्भर करेगा। निवेशकों के लिए फिलहाल कंपनी से जुड़ी कानूनी अपडेट्स पर नजर रखना सबसे जरूरी है।
