Dixon Technologies ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) में ₹48,893 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया है, जो पिछले साल की तुलना में 26% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी दिखाता है। वहीं, कंपनी का नेट प्रॉफिट (PAT) भी 20% बढ़कर ₹845 करोड़ पर पहुंच गया।
हालांकि, चौथी तिमाही (Q4) के नतीजों में रेवेन्यू ₹10,520 करोड़ पर सपाट रहा। इसके पीछे मुख्य कारण कमजोर मांग (Demand) और सप्लाई चेन में आई दिक्कतें रहीं।
इन चुनौतियों के बावजूद, कंपनी ने 8 दिन की निगेटिव वर्किंग कैपिटल साइकिल और 44.8% के ROCE जैसी मजबूत ऑपरेशनल परफॉरमेंस बरकरार रखी। साथ ही, कैपिटल एक्सपेंडिचर के बाद ₹700 करोड़ से ज़्यादा का फ्री कैश फ्लो जेनरेट किया।
Dixon अब ओरिजिनल डिजाइन मैन्युफैक्चरिंग (ODM) की ओर अपना फोकस बढ़ा रही है। इस स्ट्रैटेजी का मकसद कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन को बढ़ाना और कस्टमर लॉयल्टी को और मजबूत करना है।
कंपनी IT हार्डवेयर, टेलीकॉम और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग जैसे हाई-ग्रोथ सेगमेंट्स पर तेजी से काम कर रही है। यह कदम ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब सरकार के प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) बेनिफिट्स धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। FY26 के लिए कंपनी की नेट PLI इनकम ₹360 करोड़ रही।
Dixon भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स, होम अप्लायंसेज और मोबाइल फोन बनाने वाली एक प्रमुख कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर के तौर पर अपनी पहचान बना चुकी है। 'मेक इन इंडिया' प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं लगातार बढ़ा रही है।
Vivo जैसी बड़ी कंपनियों के साथ संभावित ज्वाइंट वेंचर (JV) इस बात का संकेत है कि कंपनी नए और बड़े बाजारों में कदम रखने की पूरी तैयारी कर रही है।
हालांकि, ग्लोबल टेंशन के चलते सप्लाई चेन और शिपिंग कॉस्ट में दिक्कतें आ सकती हैं। AI की बढ़ती मांग से चिप्स और सेमीकंडक्टर्स जैसी इनपुट कॉस्ट में भी बढ़ोतरी हो सकती है, जो प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकती है।
बाजार में कंपनी के प्रतिस्पर्धी Amber Enterprises India Ltd भी प्रोडक्ट डाइवर्सिफिकेशन और नए मैन्युफैक्चरिंग एरिया में विस्तार पर ध्यान दे रही है।
निवेशक अब Vivo JV के फाइनल होने और IT हार्डवेयर व टेलीकॉम सेगमेंट में FY27 के लिए निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने पर अपनी पैनी नज़र रखेंगे।