IPO के बाद Digilogic Systems की शानदार परफॉरमेंस
Digilogic Systems Limited ने 31 मार्च, 2026 को खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने ऑडिटेड नतीजे घोषित कर दिए हैं। यह कंपनी के लिए एक बड़ा माइलस्टोन है क्योंकि यह IPO और BSE SME प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग (28 जनवरी, 2026) के बाद पहला फाइनेंशियल रिपोर्ट है। कंपनी को ऑडिट में कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं मिली है।
रेवेन्यू और प्रॉफिट में भारी उछाल
फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी का रेवेन्यू ₹77.43 करोड़ रहा, जो पिछले साल (FY 2025) के ₹72.06 करोड़ की तुलना में 7.45% ज्यादा है।
सबसे खास बात यह है कि नेट प्रॉफिट में जबरदस्त 33.89% की ग्रोथ देखने को मिली। पिछले साल ₹7.79 करोड़ का प्रॉफिट इस साल बढ़कर ₹10.43 करोड़ हो गया है। इसी के साथ, बेसिक अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी ₹3.74 से सुधरकर ₹4.45 पर पहुंच गया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
नेट प्रॉफिट में रेवेन्यू ग्रोथ से ज्यादा की बढ़त, कंपनी की बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी और प्रॉफिटेबिलिटी को दर्शाती है। IPO से जुटाए गए फंड का इस्तेमाल कर्ज़ चुकाने में होने से कंपनी का बैलेंस शीट भी मजबूत हुआ है। यह नतीजे कंपनी के लिए एक लिस्टेड एंटिटी के तौर पर अच्छी शुरुआत का संकेत देते हैं।
IPO से मिली रकम का क्या हुआ?
Digilogic Systems ने अपने IPO के जरिए ₹69.66 करोड़ जुटाए थे। इस पैसे का एक बड़ा हिस्सा कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) के लिए रखा गया था, जिसमें नई फैसिलिटी का निर्माण और कुछ कर्ज़ चुकाना शामिल था। लिस्टेड कंपनी बनने के बाद, अब ट्रांसपेरेंट फाइनेंशियल रिपोर्टिंग और जुटाई गई पूंजी का सही इस्तेमाल कंपनी के लिए जरूरी है।
आगे क्या?
कर्ज़ चुकाने का लक्ष्य पूरा होने के बाद, कंपनी का फोकस अब अपने Capex प्लान्स पर रहेगा। निवेशक इस बात पर बारीकी से नजर रखेंगे कि IPO से बची हुई रकम का इस्तेमाल नई फैसिलिटी के निर्माण में कैसे होता है, जो कंपनी के लिए ग्रोथ का एक बड़ा जरिया बनने वाली है।
रिस्क फैक्टर
यहां एक बड़ी चिंता यह है कि IPO फंड का 'प्रस्तावित नई फैसिलिटी' वाले Capex के लिए इस्तेमाल काफी धीमा रहा है। आवंटित ₹51.68 करोड़ में से केवल ₹0.35 करोड़ का ही इस्तेमाल हुआ है। इसके अलावा, IPO से जुड़े खर्चे भी अनुमान से थोड़ा ज्यादा रहे।
