Deep Polymers के ऑडिट नतीजे सवालों के घेरे में
Deep Polymers Limited ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने ऑडिटेड नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने ₹98.72 करोड़ के स्टैंडअलोन रेवेन्यू (Standalone Revenue) पर ₹6.66 करोड़ का नेट प्रॉफिट (Net Profit) दर्ज किया है।
ऑडिट रिपोर्ट में क्या है खास?
कंपनी के ऑडिटर ने वित्तीय नतीजों पर एक 'क्वालिफाइड ओपिनियन' (Qualified Opinion) दिया है। इसका मुख्य कारण ₹3.08 करोड़ के ट्रेड रिसीवेबल्स (Trade Receivables) के लिए कंपनी द्वारा प्रोविजन (Provision) न बनाना है। ऑडिटर का मानना है कि इससे कंपनी का मुनाफा और नेट वर्थ (Net Worth) बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है। इसके अलावा, फॉरेन करेंसी रीस्टेटमेंट (Foreign Currency Restatement) को लेकर Ind-AS 21 के अनुपालन में भी कमी पाई गई है।
क्यों है यह चिंता की बात?
यह क्वालिफाइड ओपिनियन कमाई की क्वालिटी और फाइनेंशियल रिपोर्टिंग पर गंभीर सवाल खड़े करता है। निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि प्रोविजन एडजस्ट करने के बाद, कंपनी का एडजस्टेड नेट प्रॉफिट (Adjusted Net Profit) घटकर केवल ₹3.58 करोड़ रह जाता है, जो रिपोर्ट किए गए ₹6.66 करोड़ से काफी कम है। बता दें कि यह लगातार पांचवां साल है जब स्टैंडअलोन खातों पर ऑडिटर की ऐसी राय आई है, जिससे निवेशकों का भरोसा कम हो सकता है और स्टॉक वैल्यूएशन पर भी असर पड़ सकता है।
क्या है कंपनी का पक्ष?
कंपनी का कहना है कि बकाया देनदारियों की वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों को अब ₹3.58 करोड़ के एडजस्टेड नेट प्रॉफिट को कंपनी की असल लाभप्रदता का ज्यादा भरोसेमंद पैमाना मानना चाहिए। बकाया ₹3.08 करोड़ की रिकवरी की अनिश्चितता एक बड़ा जोखिम है।
