Deep Polymers Q2 Results: मुनाफा **₹2.15 करोड़** पहुंचा, लेकिन ऑडिटर की टिप्पणी से निवेशकों की बढ़ी चिंता

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Deep Polymers Q2 Results: मुनाफा **₹2.15 करोड़** पहुंचा, लेकिन ऑडिटर की टिप्पणी से निवेशकों की बढ़ी चिंता

Deep Polymers Limited ने सितंबर तिमाही के लिए **₹2.15 करोड़** का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, लेकिन कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट पर सवाल उठ रहे हैं। ऑडिटर्स ने लगातार सातवीं बार 'क्वालिफाइड ओपिनियन' जारी किया है।

नतीजे और ऑडिट पर बवाल

Deep Polymers के ताजा नतीजों में कंपनी का प्रदर्शन बेहतर दिखा है। कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान तिमाही के ₹1.75 करोड़ के मुकाबले बढ़कर ₹2.15 करोड़ हो गया है। वहीं, ऑपरेशंस से रेवेन्यू भी ₹25.75 करोड़ से बढ़कर ₹29.26 करोड़ रहा है।

क्यों परेशान हैं ऑडिटर्स?

कंपनी के ऑडिटर्स 'M/s. S N Shah & Associates LLP' ने दो प्रमुख चिंताओं के कारण अपनी रिपोर्ट में क्वालिफिकेशन जोड़ा है:

  • डूबत कर्ज (Doubtful Debts): कंपनी ने ₹1.08 करोड़ के ट्रेड रिसीवेबल्स के लिए कोई प्रोविजन नहीं किया है, जो अभी कानूनी विवादों में हैं। ऑडिटर्स का मानना है कि इससे मुनाफा और शेयरधारक फंड बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए हैं।
  • Ind AS-21 का उल्लंघन: फॉरेन करेंसी के लेनदेन को वर्तमान एक्सचेंज रेट्स पर रिस्टेट (Restate) न करने के कारण बैलेंस शीट और मुनाफे के आंकड़ों पर असर पड़ा है।

मैनेजमेंट का रुख और जोखिम

कंपनी मैनेजमेंट का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया के जरिए ₹1.08 करोड़ की वसूली हो जाएगी, इसलिए अभी प्रोविजन की जरूरत नहीं है। साथ ही, फॉरेन करेंसी के मामले में कंपनी का तर्क है कि इसका प्रभाव बहुत बड़ा नहीं था।

हालांकि, निवेशकों के लिए यह सातवीं बार है जब कंपनी को ऑडिट क्वालिफिकेशन मिला है, जो कंपनी की गवर्नेंस और अकाउंटिंग पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करता है। आने वाले समय में कानूनी रिकवरी के नतीजों और अकाउंटिंग सुधारों पर निवेशकों की कड़ी नजर होनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.