Dee Development Engineers ने वित्त वर्ष में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का रेवेन्यू **38%** बढ़कर **₹1,142 करोड़** पर पहुंच गया है, जबकि नेट प्रॉफिट **77.3%** की छलांग के साथ **₹77.2 करोड़** दर्ज किया गया है।
मुनाफे की नई ऊंचाई
Dee Development Engineers के लिए यह साल अब तक का सबसे बेहतरीन साबित हुआ है। कंपनी ने न केवल अपना रेवेन्यू ₹1,142 करोड़ तक पहुंचाया, बल्कि EBITDA मार्जिन में भी 179 bps का सुधार कर इसे 16.7% पर लाकर खड़ा किया है। इस सफलता के पीछे अंजार (Anjar) यूनिट का बड़ा हाथ है, जहां क्षमता बढ़ाकर 30,000 MTPA कर दी गई है और नया 7,000 MTPA का सीमलेस पाइप प्लांट शुरू किया गया है।
ऑपरेशंस में बदलाव और मजबूती
कंपनी अब बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर के दौर से निकलकर तेजी से एग्जीक्यूशन फेज में आ गई है। अब अंजार साइट पूरी तरह ऑयल, गैस और एक्सपोर्ट पर ध्यान देगी, जबकि पलवल फैसिलिटी हाई-मार्जिन वाले पावर सेक्टर प्रोजेक्ट्स के लिए समर्पित होगी। कंपनी के पास फिलहाल ₹1,940 करोड़ का अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर बुक मौजूद है, जो आने वाले वित्त वर्ष के लिए मजबूत रेवेन्यू विजिबिलिटी दे रहा है।
कर्ज मुक्ति और डिविडेंड का ऐलान
₹300 करोड़ का प्रेफरेंशियल इश्यू लाने के बाद कंपनी का मुख्य फोकस अब कर्ज कम करने पर है। मैनेजमेंट का लक्ष्य है कि FY29 तक कंपनी पूरी तरह से नेट-कैश हो जाए। इसके अलावा, शेयरधारकों के लिए ₹1 प्रति शेयर का डिविडेंड भी घोषित किया गया है। आने वाले साल के लिए मैनेजमेंट ने ₹1,400 करोड़ से ₹1,500 करोड़ के रेवेन्यू का टारगेट रखा है।
निवेशक इन रिस्क पर रखें नजर
फिलहाल मालवा पावर बायोमास प्लांट से जुड़ा एक टैरिफ विवाद कोर्ट में है। हालांकि हाई कोर्ट से राहत मिली है, लेकिन इसका अंतिम फैसला कंपनी के लिए अहम है। साथ ही, नई क्षमता के विस्तार के कारण वर्किंग कैपिटल साइकिल पर भी निवेशकों को नजर रखनी होगी।
