De Nora India के सितंबर तिमाही के नतीजे काफी निराशाजनक रहे हैं। कंपनी ने पिछले मुनाफे से सीधा घाटे में गोता लगाते हुए **₹2.60 करोड़** का नेट लॉस दर्ज किया है, जिसका मुख्य कारण गिरता हुआ रेवेन्यू और बढ़ता इन्वेंट्री बोझ है।
मुनाफे पर क्यों लगा ग्रहण?
De Nora India के लिए सितंबर तिमाही काफी चुनौतीपूर्ण रही है। कंपनी का रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स गिरकर ₹21.36 करोड़ पर आ गया है, जबकि पिछली जून तिमाही में यह आंकड़ा ₹35.27 करोड़ था। कंपनी का प्रॉफिट बिफोर टैक्स गिरकर ₹3.47 करोड़ के नुकसान में बदल गया है, जो सीधे तौर पर कंपनी के इलेक्ट्रोड टेक्नोलॉजीज (Electrode Technologies) सेगमेंट में आ रही दिक्कतों को दर्शाता है।\n\n### इन्वेंट्री का दबाव और कैश फ्लो पर संकट\n
निवेशकों के लिए चिंता की सबसे बड़ी वजह इन्वेंट्री मैनेजमेंट है। कंपनी की इन्वेंट्री का स्तर बढ़कर ₹73.51 करोड़ तक पहुंच गया है, जो मार्च में केवल ₹30.84 करोड़ था। इस स्टॉक जमाव के कारण कंपनी को छमाही आधार पर ₹48.36 करोड़ का नेगेटिव कैश फ्लो झेलना पड़ा है।\n\n### डिविडेंड का वादा बरकरार\n
खराब नतीजों के बावजूद, कंपनी ने अपने शेयरधारकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता निभाई है। 23 सितंबर, 2026 को हुई एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में प्रति शेयर ₹4 के फाइनल डिविडेंड को मंजूरी दी गई है। इसके लिए कंपनी को लगभग ₹2.12 करोड़ का भुगतान करना होगा।\n\n### आगे की राह\n
अब बाजार की नजरें इस पर टिकी हैं कि कंपनी अपनी बढ़ती इन्वेंट्री को कैसे लिक्विडेट करती है और कब तक वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को सामान्य कर पाती है। आने वाली तिमाहियों में ऑपरेटिंग कैश फ्लो में सुधार ही शेयर के लिए अगला बड़ा ट्रिगर होगा।
