D & H India ने प्रमोटर्स को **21.57 लाख** वारंट जारी करने की अपनी योजना को आधिकारिक तौर पर वापस ले लिया है। कंपनी के बोर्ड ने इसके पीछे शेयर की बढ़ती कीमतों और BSE से रेगुलेटरी अप्रूवल में देरी को वजह बताया है। अब कंपनी आंतरिक स्रोतों और कर्ज के जरिए फंड जुटाएगी, जिससे मौजूदा शेयरहोल्डर्स को इक्विटी डाइल्यूशन से राहत मिलेगी।
फंडिंग का रास्ता बदला
D & H India Limited ने ₹32.57 करोड़ के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसके तहत प्रमोटर ग्रुप को 21,57,000 कन्वर्टिबल वारंट जारी किए जाने थे। 15 अक्टूबर, 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग में यह फैसला लिया गया, जबकि इस योजना को मार्च 2026 में मंजूरी दी गई थी। इस इश्यू की कीमत ₹151 प्रति शेयर तय की गई थी।
क्यों लिया गया यह कदम?
इस रणनीतिक बदलाव के पीछे दो मुख्य कारण हैं—पहला, कंपनी के शेयर की कीमतों में आया उछाल और दूसरा, BSE से 'इन-प्रिंसिपल' अप्रूवल मिलने में होने वाली लंबी देरी। इस फैसले से कंपनी ने अपने मौजूदा शेयरहोल्डर्स को इक्विटी डाइल्यूशन (Equity Dilution) के असर से बचा लिया है, जो वारंट कन्वर्ट होने के बाद होता।
अब आगे की राह क्या है?
ऑडिट कमेटी की सिफारिश के बाद, कंपनी ने इक्विटी-लिंक्ड फंडिंग के बजाय अब आंतरिक बचत (Internal Accruals) और बैंकों से कर्ज लेने का फैसला किया है। अब सारा बोझ इक्विटी होल्डर्स के बजाय कंपनी की बैलेंस शीट पर आएगा।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risks)
बैंकों से कर्ज लेना कंपनी के लिए ब्याज की नई देनदारियां लेकर आएगा। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में कंपनी के डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) पर नजर रखनी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कर्ज का स्तर सीमा से बाहर न जाए।
