Consolidated Construction Consortium Limited के Q2 FY27 नतीजों में रेवेन्यू बढ़कर **₹126.34 करोड़** रहा, लेकिन नेट लॉस बढ़कर **₹12.68 करोड़** पर पहुंच गया है।
मुनाफे पर क्यों लगी सेंध?
कंपनी ने शानदार परफॉर्मेंस दिखाते हुए रेवेन्यू में 91.2% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी अधिक है। हालांकि, मुनाफे की जगह कंपनी का नेट लॉस साल-दर-साल आधार पर ₹0.43 करोड़ से बढ़कर ₹12.68 करोड़ हो गया है। फिलहाल कंपनी का ऑर्डर बुक ₹1,174.07 करोड़ पर बना हुआ है।
ऑडिटर की चेतावनी (Auditor’s Qualified Opinion)
इस तिमाही नतीजों के साथ एक बड़ा जोखिम भी जुड़ा है। स्टेट्यूटरी ऑडिटर M/s ASA & Associates LLP ने नतीजों पर 'क्वालिफाइड ओपिनियन' जारी किया है। ऑडिटर ने लोन और क्रेडिटर्स के बैलेंस कन्फर्मेशन न मिलने और MSME ड्यूज के पर्याप्त प्रमाण न होने पर सवाल उठाए हैं। साथ ही, पुराने वैधानिक भुगतानों पर ब्याज या पेनल्टी की अनदेखी के चलते कंपनी की देनदारियां (Liabilities) रिपोर्ट से कहीं ज्यादा हो सकती हैं।
मैनेजमेंट का क्या कहना है?
कंपनी मैनेजमेंट ने स्पष्ट किया है कि बैलेंस री-कॉन्साइल होने के बाद कोई बड़ा बदलाव आने की उम्मीद नहीं है। मैनेजमेंट का दावा है कि कैश फ्लो की दिक्कतों के कारण पहले जो देरी हुई थी, उसे सुलझा लिया गया है और प्रोजेक्ट्स पर लिक्विडेटेड डैमेज का रिस्क बहुत कम है।
निवेशकों के लिए जोखिम
ऑडिटर की चिंताएं गंभीर हैं। यदि MSME बकाए पर ब्याज का बोझ सामने आता है, तो बैलेंस शीट पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद बढ़ता घाटा यह संकेत दे रहा है कि कंपनी का कॉस्ट मैनेजमेंट अभी भी भारी दबाव में है। निवेशकों को आने वाले दिनों में क्रेडिटर री-कंसीलिएशन और रेगुलेटरी अपडेट्स पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
