Cochin Shipyard ने HBL Engineering के साथ मिलकर 'ग्रीन मैरीटाइम प्रोपल्शन प्राइवेट लिमिटेड' नाम से एक नई ज्वाइंट वेंचर (JV) कंपनी बनाई है। यह JV समुद्री क्षेत्र के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशंस पर काम करेगी, जिसका लक्ष्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार दोनों हैं।
Cochin Shipyard ने लॉन्च की नई ग्रीन प्रोपल्शन JV
Cochin Shipyard Limited (CSL) ने HBL Engineering Limited के साथ मिलकर 'ग्रीन मैरीटाइम प्रोपल्शन प्राइवेट लिमिटेड' नाम से एक नई ज्वाइंट वेंचर (JV) कंपनी का इनकॉर्पोरेशन (incorporation) पूरा कर लिया है। इस नई कंपनी की शुरुआत ₹9 करोड़ के शुरुआती कैपिटल (capital) के साथ हुई है।
क्यों है यह अहम?
CSL का यह कदम समुद्री क्षेत्र (maritime sector) के लिए स्वदेशी (indigenous) इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और एनर्जी स्टोरेज टेक्नोलॉजी को विकसित करने की दिशा में एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। यह भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के अनुरूप है और इसका लक्ष्य घरेलू और वैश्विक बाजारों दोनों में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड प्रोपल्शन सिस्टम (propulsion systems) की बढ़ती मांग को पूरा करना है।
पूरी कहानी
इस ज्वाइंट वेंचर का एग्रीमेंट (agreement) पहली बार 25 मार्च 2026 को घोषित किया गया था, और अब इसका इनकॉर्पोरेशन पूरा हो गया है। सरकारी कंपनी CSL ने इस JV को शुरू करने से पहले बंदरगाह, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) और DIPAM से जरूरी मंजूरी हासिल कर ली थी।
आगे क्या होगा?
यह नई JV जहाजों के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशंस को विकसित करने और उन्हें कमर्शियलाइज (commercialize) करने पर ध्यान केंद्रित करेगी। Cochin Shipyard की इसमें 40% हिस्सेदारी होगी, जिसके लिए ₹3.60 करोड़ का निवेश किया गया है। वहीं, HBL Engineering की 60% हिस्सेदारी होगी, जिसमें ₹5.40 करोड़ का निवेश किया गया है। यह निवेश नकद (cash) के माध्यम से किया गया है।
जोखिम (Risks) पर भी नजर
चूंकि यह एक नई शुरुआत है, इसलिए इसमें नई टेक्नोलॉजी को सफलतापूर्वक विकसित करने, मैन्युफैक्चरिंग या R&D क्षमताएं स्थापित करने और इन सॉल्यूशंस को बाजार में लाने में लगने वाले समय जैसी चुनौतियां हो सकती हैं।
