Cochin Shipyard के लिए FY26 मिला-जुला रहा। कंपनी का टर्नओवर **₹5,022 करोड़** रहा और ऑर्डर बुक **₹22,000 करोड़** के पार है, लेकिन बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की कमी के कारण रेगुलेटरी चुनौतियां बनी हुई हैं।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर एक नजर
Cochin Shipyard ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कुल टर्नओवर पिछले साल के ₹4,820 करोड़ से बढ़कर ₹5,022 करोड़ हो गया है। हालांकि, नेट प्रॉफिट (PAT) में गिरावट देखी गई है, जो ₹827 करोड़ से घटकर ₹717 करोड़ पर आ गया है। इसके बावजूद, कंपनी ने प्रति शेयर ₹9 का डिविडेंड घोषित किया है।
ऑर्डर बुक और विस्तार
कंपनी की रेवेन्यू विजिबिलिटी बेहद मजबूत है। फिलहाल कंपनी के पास ₹22,000 करोड़ से अधिक के ऑर्डर्स हैं। इसमें CMA CGM के लिए 6 LNG-fuelled कंटेनर वेसल्स और Svitzer के लिए इलेक्ट्रिक टग्स जैसे प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। कंपनी अपने 'CRUISE 2030 2.0' रोडमैप के तहत गुजरात के Vadinar में ₹1,570 करोड़ की लागत से नया शिप रिपेयर क्लस्टर भी तैयार कर रही है।
गवर्नेंस का संकट
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बोर्ड की कंपोजिशन है। SEBI (LODR) नियमों के अनुसार कंपनी में 6 इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स होने चाहिए, जबकि मार्च 2026 तक केवल 1 ही डायरेक्टर मौजूद था। कंपनी का कहना है कि यह एक CPSE है और नियुक्ति का जिम्मा भारत सरकार के पास है। इस नियमों के उल्लंघन के चलते स्टॉक एक्सचेंज कंपनी पर जुर्माना भी लगा चुके हैं।
आगे देखना होगा कि सरकार कब तक बोर्ड में नई नियुक्तियां करती है, क्योंकि यह मामला स्टॉक के सेंटिमेंट पर असर डाल सकता है।
