Chrome Silicon का बड़ा ऐलान: Rudraram यूनिट बिकेगी, Ferro Alloys बंद
Chrome Silicon Ltd ने अपने Rudraram स्थित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को बेचने की योजना बनाई है। कंपनी ने 30 मई, 2025 से Ferro Alloys का प्रोडक्शन भी स्थायी रूप से बंद कर दिया है। इस वित्तीय वर्ष (FY26) में कंपनी ने ₹9.84 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया है, जो पिछले साल के ₹85.94 करोड़ के मुकाबले काफी कम है।
क्या हुआ?
कंपनी ने अपनी Rudraram यूनिट में Ferro Alloys का प्रोडक्शन बंद करने का फैसला किया है। इसके पीछे हाई पावर कॉस्ट, पुरानी टेक्नोलॉजी और बाजार की अस्थिरता को वजह बताया गया है। बोर्ड ने अब इस यूनिट के प्लांट, मशीनरी और इक्विपमेंट को बेचने की मंजूरी दे दी है। यह यूनिट कंपनी के कुल कारोबार का 100% है। इस डील के 31 अक्टूबर, 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। बिकने से मिले पैसों का इस्तेमाल कर्ज चुकाने और वर्किंग कैपिटल में किया जाएगा।
क्यों अहम है यह फैसला?
यह Chrome Silicon के लिए एक बड़ा स्ट्रेटेजिक बदलाव है, क्योंकि कंपनी अपने कोर मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशंस को खत्म कर रही है। पूरी यूनिट को बेचने के लिए शेयरहोल्डर्स की मंजूरी जरूरी होगी, जिसके लिए पोस्टल बैलेट का इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, FY26 में घाटा कम हुआ है, लेकिन यह प्रोडक्शन कम होने की वजह से हुआ है, न कि बेहतर प्रॉफिटेबिलिटी के कारण।
बैकस्टोरी
Chrome Silicon की Ferro Alloys मैन्युफैक्चरिंग यूनिट 30 मई, 2025 से बंद पड़ी है। कंपनी ने यह फैसला एक इंडिपेंडेंट इवैल्यूएशन के बाद लिया कि इसे दोबारा शुरू करना फायदामंद नहीं है। FY26 में कंपनी की कुल इनकम घटकर ₹10.57 करोड़ रह गई, जो FY25 में ₹76.49 करोड़ थी।
अब क्या बदलेगा?
अगर शेयरहोल्डर्स से मंजूरी मिल जाती है, तो कंपनी अपनी पूरी मैन्युफैक्चरिंग बेस को बेच देगी। इससे कंपनी का स्ट्रक्चर पूरी तरह बदल जाएगा और यह मैन्युफैक्चरिंग से हटकर सेल प्रोसीड्स को मैनेज करने पर फोकस करेगी। FY26 के लिए बेसिक EPS ₹(6.00) रहा, जो FY25 में ₹(53.78) था।
रिस्क फैक्टर
FY26 के फाइनेंशियल रिजल्ट्स पर कंपनी के ऑडिटर ने क्वालिफाइड ओपिनियन दिया है। इसमें Ind AS स्टैंडर्ड्स का पालन न करना, एसेट्स और इन्वेंटरी का फिजिकल वेरिफिकेशन न होना, और इंटरेस्ट-फ्री लोन और एडवांसेज की रिकवरी को लेकर अनिश्चितता जैसे मुद्दे शामिल हैं।
आगे क्या?
निवेशकों को शेयरहोल्डर अप्रूवल के लिए होने वाले पोस्टल बैलेट के नतीजों पर नजर रखनी चाहिए। इसके अलावा, कंपनी का कर्ज और वर्किंग कैपिटल मैनेज करने की क्षमता और प्लांट बिकने के बाद की स्ट्रेटेजी अहम होगी।
