Chrome Silicon पर ₹9.84 करोड़ का घाटा, बंद हैं ऑपरेशन्स, ऑडिटर की रिपोर्ट चिंताजनक
- नेट लॉस: ₹9.84 करोड़ (₹984.00 लाख)
- कुल इनकम: ₹10.57 करोड़ (₹1,056.86 लाख)
निवेशकों के लिए खास: कंपनी गंभीर ऑपरेशनल और फाइनेंशियल संकट से जूझ रही है, भविष्य अनिश्चित।
क्या हुआ?
Chrome Silicon Limited ने 31 मार्च 2026 को खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹9.84 करोड़ का नेट लॉस रिपोर्ट किया है। कंपनी की कुल इनकम पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹76.49 करोड़ से गिरकर सिर्फ ₹10.57 करोड़ रह गई। सबसे बड़ी बात यह है कि फेरो अलॉयज (Ferro Alloys) का मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन 30 मई 2025 से बंद पड़ा है, जिसका कारण बाजार की खराब स्थितियां बताई जा रही हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह स्थिति निवेशकों के लिए बेहद गंभीर है, क्योंकि यह कंपनी के बड़े ऑपरेशनल और फाइनेंशियल संकट की ओर इशारा करती है। मैन्युफैक्चरिंग बंद होने से सीधे तौर पर रेवेन्यू और प्रॉफिट पर असर पड़ा है। इसके अलावा, स्टेटुटरी ऑडिटर (Statutory Auditor) की क्वालिफाइड ओपिनियन (Qualified Opinion) कंपनी की फाइनेंशियल रिपोर्टिंग और इंटरनल कंट्रोल्स पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिससे यह भी संदेह पैदा होता है कि कंपनी आगे भी काम कर पाएगी या नहीं।
पृष्ठभूमि
कंपनी ने फेरो अलॉयज (Ferro Alloys) का मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन पूरी तरह बंद कर दिया है। मैनेजमेंट का कहना है कि वे मार्केट की स्थितियों पर नजर रख रहे हैं और ऑपरेशन्स को फिर से शुरू करने का फैसला करेंगे, लेकिन उन्होंने कोई समय-सीमा नहीं बताई है। रेवेन्यू में आई भारी गिरावट का मुख्य कारण यही ऑपरेशनल रुकावट है।
अब क्या बदलेगा?
निवेशकों को अभी अनिश्चितता के लिए तैयार रहना चाहिए। कंपनी को ऑपरेशन्स फिर से शुरू करने के लिए एक स्पष्ट प्लान दिखाना होगा और ऑडिटर द्वारा उठाए गए गंभीर मुद्दों का समाधान करना होगा। इनके बिना, कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ नाजुक बनी रहेगी।
जोखिम
मुख्य जोखिमों में ऑपरेशन्स का लंबे समय तक बंद रहना, मैन्युफैक्चरिंग फिर से शुरू करने में असमर्थता, और एसेट्स के फिजिकल वेरिफिकेशन, लोन और एडवांसेस की रिकवरी, अनकन्फर्म्ड लायबिलिटीज़, और अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स व MSME एक्ट का पालन न करने जैसी अनसुलझी समस्याएं शामिल हैं। ऑडिटर का यह संदेह कि कंपनी 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) के तौर पर काम नहीं कर पाएगी, एक बड़ा रेड फ्लैग है।
ऑडिटर की क्वालिफिकेशन्स और चिंताएं
स्टैटुटरी ऑडिटर, Pavuluri & Co., ने एक क्वालिफाइड ओपिनियन (Qualified Opinion) जारी किया है। मुख्य चिंताओं में प्रॉपर्टी, प्लांट और इक्विपमेंट (PPE) और इन्वेंटरीज (Inventories) के फिजिकल वेरिफिकेशन में विफलता शामिल है। ब्याज-मुक्त लोन और एडवांसेस (₹6.65 करोड़) और सप्लायर एडवांसेस (₹19.77 करोड़) की रिकवरी को लेकर मटेरियल अनसर्टेनिटीज (Material Uncertainties) बनी हुई हैं। कंपनी ₹4.36 करोड़ के बोरिंग्स (Borrowings), ₹7.18 करोड़ के ट्रेड पेएबल्स (Trade Payables), और ₹16.36 करोड़ की अन्य लायबिलिटीज़ (Other Liabilities) के लिए कन्फर्मेशन (Confirmations) भी प्रदान नहीं कर सकी। इंड AS 19 (Ind AS 19) के तहत एम्प्लॉई बेनिफिट्स (Employee Benefits) और MSME एक्ट 2006 के तहत ट्रेड पेएबल्स (Trade Payables) का पालन न करना भी नोट किया गया।
मुख्य आंकड़े (समय-सीमा के साथ)
- रेवेन्यू में गिरावट: FY 2025 के ₹76.49 करोड़ से घटकर FY 2026 में कुल इनकम ₹10.57 करोड़ रह गई।
- नेट लॉस: FY 2026 में नेट लॉस घटकर ₹9.84 करोड़ हो गया, जो FY 2025 में ₹85.94 करोड़ था। हालांकि, यह गिरावट मुख्य रूप से ऑपरेशनल सस्पेंशन के बाद खर्चों में हुई बड़ी कमी के कारण है।
- खर्च: कुल खर्च FY 2025 के ₹162.43 करोड़ से घटकर FY 2026 में ₹20.41 करोड़ हो गया।
- कैश फ्लो: ऑपरेटिंग एक्टिविटीज से नेट कैश फ्लो FY 2026 में (-) ₹19.10 करोड़ रहा।
