लागत का बोझ, मुनाफे पर भारी पड़ा
Chiraharit Limited ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के अपने ऑडिटेड नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का अकेला मुनाफा (Standalone Net Profit) साल-दर-साल 94% घटकर ₹0.41 करोड़ रह गया, जो कि FY25 में ₹6.50 करोड़ था। वहीं, अकेले रेवेन्यू (Standalone Revenue) में भी थोड़ी गिरावट आई है, जो ₹51.40 करोड़ से घटकर ₹48.23 करोड़ हो गया।
कंसॉलिडेटेड (Consolidated) स्तर पर भी यही हाल रहा। कंसॉलिडेटेड मुनाफा घटकर ₹0.09 करोड़ रह गया, जबकि कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू बढ़कर ₹54.86 करोड़ हो गया।
इन वजहों से गिरी मुनाफाखोरी
कंपनी के मुताबिक, मुनाफे में इस भारी गिरावट की मुख्य वजह कच्चे माल (Raw Material) और फ्यूल की कीमतों में आई बेतहाशा बढ़ोतरी है। कंपनी ने बताया कि इन बढ़ी हुई लागतों को वे ग्राहकों पर नहीं डाल पाए, क्योंकि उनके सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स (Supply Contracts) थोड़े समय के लिए ही थे। इसके अलावा, HDPE जैसे कच्चे माल की कीमतों में 60% से ज्यादा का इजाफा हुआ है।
IPO फंड का इस्तेमाल और ऑडिटर नियुक्ति
कंपनी ने यह भी साफ किया है कि अक्टूबर 2025 में जुटाए गए IPO फंड का इस्तेमाल पूरी तरह से तय योजनाओं के मुताबिक ही हो रहा है। 31 मार्च 2026 तक ₹31.07 करोड़ में से ₹21.15 करोड़ का इस्तेमाल किया जा चुका है। बोर्ड ने M/s. K.P. & Associates की आंतरिक ऑडिटर (Internal Auditor) के तौर पर और M/s. R&A Associates की सीक्रेटेरियल ऑडिटर (Secretarial Auditor) के तौर पर नियुक्ति को भी मंजूरी दे दी है।
आगे क्या देखना होगा
निवेशकों की नजरें अब कंपनी पर होंगी कि वह कैसे बढ़ती लागतों को मैनेज करती है और भविष्य के कॉन्ट्रैक्ट्स में बेहतर प्राइसिंग पावर हासिल कर पाती है। कंपनी का सारा कारोबार एक ही सेगमेंट (Single Business Segment) में होने के कारण, वह कमोडिटी की कीमतों के उतार-चढ़ाव के प्रति ज्यादा संवेदनशील है।
