Captain Polyplast ने Q2 FY27 के लिए दमदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू **32.89%** बढ़कर **₹106.43 करोड़** पर पहुंच गया है। हालाँकि रॉ मटीरियल की बढ़ती लागत के कारण मार्जिन पर दबाव देखा गया, लेकिन PM-KUSUM स्कीम के तहत **₹70.6 करोड़** के नए सोलर ऑर्डर ने कंपनी के आउटलुक को मजबूत कर दिया है।
मुनाफे का गणित और मार्जिन का दबाव
कंपनी ने Q2 FY27 में ₹106.43 करोड़ का कुल रेवेन्यू दर्ज किया है, जो साल-दर-साल 32.89% की शानदार बढ़ोतरी है। वहीं, नेट प्रॉफिट में 5.55% की मामूली वृद्धि देखी गई और यह ₹4.48 करोड़ रहा। कंपनी के मुताबिक, HDPE और LLDPE जैसे कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के चलते EBITDA मार्जिन पिछले साल के 10.29% से गिरकर 9.66% पर आ गया है।
सोलर सेक्टर में बड़ी जीत
इस तिमाही की सबसे बड़ी खबर कंपनी का सोलर EPC सेक्टर में विस्तार है। Captain Polyplast ने MSEDCL से PM-KUSUM स्कीम के तहत ₹70.6 करोड़ के दो बड़े रिपीट ऑर्डर हासिल किए हैं। इसमें कुल 3,000 पंप लगाए जाएंगे। कंपनी का मानना है कि यह अब तक का सबसे बड़ा सोलर EPC ऑर्डर है, जिसका रेवेन्यू Q3 FY27 के अंत तक बुक्स में नजर आने लगेगा।
ऑपरेशनल बदलाव और भविष्य की रणनीति
फिलहाल, कंपनी का वर्किंग कैपिटल साइकिल लगभग 8 महीने का है क्योंकि यह काफी हद तक सब्सिडी-आधारित माइक्रो-इरीगेशन सेल्स पर निर्भर है। मैनेजमेंट का लक्ष्य है कि सोलर प्रोजेक्ट्स की बढ़ती हिस्सेदारी के साथ इस साइकिल को साल के अंत तक 5-6 महीने तक लाया जाए।
मैनेजमेंट ने वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में EBITDA मार्जिन को लगभग 1.5% तक सुधारने की योजना बनाई है। इसके अलावा, अहमदाबाद मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में परिचालन दक्षता बढ़ाने और नॉन-सब्सिडी बिज़नेस (एक्सपोर्ट समेत) पर जोर देकर कंपनी अपने राजस्व आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यह प्रॉफिटेबिलिटी को सीधे प्रभावित करता है। साथ ही, चूंकि माइक्रो-इरीगेशन इंडस्ट्री का 90% हिस्सा सरकारी सब्सिडी पर टिका है, इसलिए कैश फ्लो सरकारी फंड रिलीज पर निर्भर करता है, जिससे रिसीवेबल पोजीशन अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।
