Capacite Infraprojects के Q2 के नतीजे सामने आए हैं, जहाँ कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर **₹770.93 करोड़** हो गया है, हालांकि नेट प्रॉफिट मामूली गिरावट के साथ **₹47.56 करोड़** रहा। कंपनी अब दुबई और युगांडा में अपने कारोबार का विस्तार कर रही है, लेकिन **₹11.56 करोड़** की बकाया राशि (receivables) को लेकर ऑडिटर की ओर से बार-बार जताई जा रही चिंता निवेशकों के लिए एक बड़ा रिस्क है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर एक नज़र
कंपनी ने सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही के जो आंकड़े जारी किए हैं, उसमें रेवेन्यू का ग्राफ ऊपर गया है। पिछले साल की समान अवधि में यह ₹646.16 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹770.93 करोड़ हो गया है। हालांकि, मुनाफे के मोर्चे पर कंपनी को झटका लगा है और नेट प्रॉफिट ₹51.06 करोड़ से घटकर ₹47.56 करोड़ पर आ गया है।
दुबई और युगांडा में कदम
ग्रोथ को रफ्तार देने के लिए कंपनी ने अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख किया है। बोर्ड ने दुबई में 75% हिस्सेदारी वाली एक कंपनी और युगांडा में एक सब्सिडियरी बनाने को मंजूरी दी है। यह कदम कंपनी के लिए भारत से बाहर EPC प्रोजेक्ट्स में अपनी पकड़ मजबूत करने का एक बड़ा जरिया बन सकता है।
ऑडिटर का 'Qualification' क्यों बना सिरदर्द?
कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अभी भी ऑडिट रिपोर्ट में दिख रही है। ऑडिटर ने ₹11.56 करोड़ के ट्रेड रिसीवेबल्स की रिकवरी पर सवाल खड़े किए हैं, क्योंकि उन्हें पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं। गौर करने वाली बात यह है कि यह पहली बार नहीं है; सितंबर 2025 और मार्च 2026 की रिपोर्ट में भी इसी तरह की बातें कही गई थीं। इसके अलावा, करीब ₹54.93 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट एसेट्स भी कानूनी रिकवरी प्रक्रिया में फंसे हुए हैं।
निवेशकों को सलाह है कि वे कंपनी के कैश फ्लो और इन बकाया राशियों के निपटारे पर बारीकी से नजर रखें, क्योंकि बार-बार आ रही ऑडिट क्वालिफिकेशन मैनेजमेंट की इंटरनल कंट्रोल प्रणाली पर सवालिया निशान लगाती है।
