CMR Green Technologies: बंपर कमाई! FY26 में रेवेन्यू **29.5%** बढ़ा, नेट प्रॉफिट **47%** चढ़ा

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AuthorNeha Patil|Published at:
CMR Green Technologies: बंपर कमाई! FY26 में रेवेन्यू **29.5%** बढ़ा, नेट प्रॉफिट **47%** चढ़ा

CMR Green Technologies ने FY26 के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू **29.56%** बढ़कर **₹8,640.19 करोड़** हो गया, जबकि नेट प्रॉफिट (PAT) **47.30%** की छलांग लगाकर **₹228.38 करोड़** पर पहुंच गया। यह बढ़त मुख्य रूप से एल्युमिनियम रीसाइक्लिंग बिजनेस में मजबूत बिक्री की वजह से आई है।

CMR Green Technologies का दमदार प्रदर्शन: FY26 में रेवेन्यू 29.56% बढ़ा

CMR Green Technologies लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी के रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस में 29.56% का जबरदस्त इजाफा हुआ है, जो ₹8,640.19 करोड़ रहा। इसके साथ ही, कंपनी के नेट प्रॉफिट (PAT) में भी 47.30% की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह ₹228.38 करोड़ तक पहुंच गया।

क्यों आई इतनी बड़ी बढ़त?

कंपनी के मैनेजमेंट का कहना है कि यह शानदार प्रदर्शन एल्युमिनियम रीसाइक्लिंग बिजनेस में बढ़ी हुई वॉल्यूम और बेहतर रियलाइजेशन के कारण संभव हुआ है। चौथे क्वार्टर (Q4 FY26) में भी कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा, जिसमें रेवेन्यू 45.38% YoY बढ़ा और PAT पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में लगभग 191% उछल गया।

कंपनी की बैकस्टोरी और भविष्य की योजना

CMR Green Technologies भारत के सेकेंडरी एल्युमिनियम मार्केट में सबसे बड़ी खिलाड़ी है और इसका मार्केट शेयर सबसे ज्यादा है। कंपनी 8 राज्यों में फैली 13 रीसाइक्लिंग यूनिट्स का संचालन करती है। कंपनी ने जापानी कंपनियों के साथ स्ट्रेटेजिक जॉइंट वेंचर्स भी किए हैं, जिनसे उन्हें बिलेट कास्टिंग और अलॉय रीसाइक्लिंग जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी मिली हैं। कंपनी अब लो-कार्बन एक्सट्रूज़न बिलेट्स और यूज्ड बेवरेज कैन रीसाइक्लिंग जैसे नए सेगमेंट में भी कदम रखने की तैयारी कर रही है, जो भविष्य में कमाई के नए रास्ते खोल सकते हैं।

निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें (Risks to Watch)

हालांकि, निवेशकों को कुछ बातों पर ध्यान देना होगा। FY26 में कंपनी का ऑपरेटिंग एक्टिविटीज से कैश फ्लो निगेटिव रहा, जिसका मुख्य कारण वर्किंग कैपिटल और इन्वेंट्री में वृद्धि है। कंपनी कमोडिटी की कीमतों और करेंसी में उतार-चढ़ाव के प्रति भी संवेदनशील है, जिसके लिए उन्हें डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स के जरिए हेजिंग करनी पड़ती है। साथ ही, कुल उधारी में बढ़ोतरी पर भी नजर रखने की जरूरत है।

आगे क्या देखें?

निवेशकों को कंपनी के वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट और ऑपरेटिंग कैश फ्लो पर पड़ने वाले इसके प्रभाव पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। कमोडिटी की कीमतों की अस्थिरता के खिलाफ उनकी हेजिंग रणनीतियों की प्रभावशीलता और कर्ज के स्तर का प्रबंधन भी भविष्य में महत्वपूर्ण कारक होंगे।

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