CMI Ltd का संकट गहराया: Q3 में **₹1.79 करोड़** का घाटा, इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया के बीच निवेशकों की बढ़ी चिंता

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AuthorNeha Patil|Published at:
CMI Ltd का संकट गहराया: Q3 में **₹1.79 करोड़** का घाटा, इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया के बीच निवेशकों की बढ़ी चिंता

दिवालिया प्रक्रिया (CIRP) से गुजर रही कंपनी CMI Ltd ने दिसंबर तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी को इस तिमाही में **₹1.79 करोड़** का नेट लॉस हुआ है, जबकि ऑडिटर्स ने कंपनी की वित्तीय सेहत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

भारी कर्ज और अनिश्चितता का दौर

कंपनी के हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसका कुल संचित घाटा (Accumulated Losses) ₹170.43 करोड़ तक पहुंच चुका है, जो इसकी पेड-अप कैपिटल (₹16.03 करोड़) से कई गुना ज्यादा है। फिलहाल कंपनी का कामकाज बोर्ड के बजाय 'रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल' (Resolution Professional) के अधीन है।

ऑडिटर्स की 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन'

स्टैच्यूटरी ऑडिटर्स 'कुमार प्रमोद एंड एसोसिएट्स' ने इस बार एक चौंकाने वाली रिपोर्ट दी है। उन्होंने साफ कहा है कि वे कंपनी की वित्तीय स्थिति को वेरिफाई करने की स्थिति में नहीं हैं। ऑडिट रिपोर्ट में फिक्स्ड एसेट रजिस्टर का न होना, बैंक बैलेंस का सत्यापन न होना और इन्वेंट्री व ट्रेड रिसीवेबल्स के दस्तावेजों की कमी जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं। इसका मतलब है कि कंपनी की बैलेंस शीट फिलहाल भरोसेमंद नहीं है।

निवेशकों के लिए जोखिम (Investor Risks)

केनरा बैंक द्वारा शुरू की गई यह इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया अब अपने निर्णायक दौर में है। कंपनी की भविष्य की राह पूरी तरह से कानूनी कार्यवाही और बिडिंग प्रोसेस के नतीजों पर टिकी है। इसके अलावा, जीएसटी (GST) और टीडीएस (TDS) से जुड़े पुराने विवादों के अनिश्चित होने के कारण बैलेंस शीट में भविष्य में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

फिलहाल, शेयरधारकों को अब 'रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल' द्वारा दी जाने वाली अपडेट्स पर बारीक नजर रखनी चाहिए, क्योंकि कंपनी के आगे जारी रहने (Going Concern) पर अभी भी बड़ा संकट मंडरा रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.