Bondada Engineering ने अपनी नई सब्सिडियरी 'PhotonicGrid Networks Private Limited' को इनकॉर्पोरेट किया है। कंपनी अब EPC से आगे बढ़कर फाइबर ऑप्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर के 'बिल्ड, ओन और ऑपरेट' मॉडल में उतर रही है, जिसका मकसद AI और डेटा सेंटर की बढ़ती डिमांड से कमाई करना है।
एसेट-ओनरशिप मॉडल की ओर बड़ा कदम
Bondada Engineering अब अपनी पारंपरिक EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) सर्विसेज से आगे बढ़कर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के मालिकाना हक (Asset-heavy) की ओर कदम बढ़ा रही है। कंपनी का मकसद अब केवल कॉन्ट्रैक्ट्स पर काम करना नहीं, बल्कि खुद फाइबर नेटवर्क को 'बिल्ड, ओन और ऑपरेट' करना है।
क्यों खास है यह मूव?
यह कदम कंपनी के रेवेन्यू मॉडल को पूरी तरह बदल सकता है। अब तक कंपनी एक बार के सर्विस कॉन्ट्रैक्ट्स पर आधारित थी, लेकिन इस नए मॉडल से उसे लॉन्ग-टर्म और रिकरिंग रेवेन्यू स्ट्रीम मिलने की उम्मीद है। मुख्य रूप से AI फर्मों, डेटा सेंटर्स और हाइपरस्केलर्स को टारगेट किया जा रहा है जिन्हें हाई-स्पीड कनेक्टिविटी की भारी जरूरत है।
फिलहाल क्या है स्थिति?
- ऑपरेशनल स्टेटस: PhotonicGrid फिलहाल प्री-ऑपरेटिव स्टेज में है और अभी कोई कमर्शियल कामकाज शुरू नहीं हुआ है।
- नियामक मंजूरी: कंपनी अभी डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) से जरूरी लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन लेने की प्रक्रिया में है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को यह समझना होगा कि इंफ्रास्ट्रक्चर खुद ओन करने में शुरुआती कैपिटल एक्सपेंडिचर काफी ज्यादा होता है। कंपनी की सफलता पूरी तरह से इस पर निर्भर करेगी कि वह बड़े डेटा सेंटर ऑपरेटर्स के साथ कितने बड़े और लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स साइन कर पाती है। आगे चलकर कंपनी के बैलेंस शीट पर कैपिटल एलोकेशन का असर देखना काफी महत्वपूर्ण होगा।
