Bilcare Limited ने अपनी 39वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) की तारीख 26 सितंबर 2026 तय की है। बोर्ड ने अधिकारियों की पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दे दी है, लेकिन ऑडिट रिपोर्ट में कंपनी के इंटरनल कंट्रोल्स और भविष्य की कार्यक्षमता (Going Concern) को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
मुनाफे और रेवेन्यू का हाल
कंपनी के फाइनेंशियल आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति मिली-जुली है। फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹763.55 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹806.50 करोड़ से कम है। हालांकि, नेट लॉस में कुछ सुधार जरूर देखने को मिला है, जो ₹28.16 करोड़ से घटकर ₹17.28 करोड़ पर आ गया है।
बोर्ड में बड़े बदलाव
AGM की तैयारियों के बीच बोर्ड ने कंपनी के फाउंडर मोहन भंडारी को एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया है। साथ ही, डॉ. कविता भंसाली को अगले 3 साल के लिए फिर से नियुक्त किया गया है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसने NCLT के निर्देशों का पालन करते हुए पब्लिक डिपॉजिट्स को IEPF में ट्रांसफर कर दिया है।
ऑडिटर्स की चेतावनी: क्या है जोखिम?
स्टैच्यूटरी ऑडिटर ने कंपनी के इंटरनल फाइनेंशियल कंट्रोल्स में खामियां निकाली हैं। मुख्य रूप से 'पीरियड-एंड क्लोजिंग' और पेटेंट के फिक्स्ड एसेट रजिस्टर के रखरखाव को लेकर 'क्वालिफाइड ओपिनियन' दिया गया है। ऑडिटर ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि कंपनी अपनी आगे की कारोबारी यात्रा (Going Concern) को लेकर कितनी सक्षम है। भविष्य की कामयाबी पूरी तरह से कंपनी के 'ग्लोबल क्लिनिकल सप्लाइज' बिजनेस के प्रदर्शन पर टिकी है।
कॉर्पोरेट अपडेट्स
कंपनी Caprihans India Limited में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर काम कर रही है। इसके अलावा, मार्च 2026 में अपनी यूके स्थित सब्सिडियरी Bilcare GCS Limited का लिक्विडेशन पूरा कर लिया गया है। निवेशकों को सलाह है कि वे इंटरनल कंट्रोल्स को ठीक करने और टर्नअराउंड प्लान पर मैनेजमेंट की अगली चालों पर पैनी नजर रखें।
