Bihar Sponge Iron ने Q1 FY27 के लिए शून्य ऑपरेशनल रेवेन्यू (Operational Revenue) की रिपोर्ट दी है, क्योंकि प्लांट रीवॉयंपिंग (Revamping) के दौर से गुजर रहा है। हालांकि, ₹2.48 करोड़ का नेट प्रॉफिट (Net Profit) 'अन्य आय' (Other Income) की वजह से हुआ है। ऑडिटर की रिपोर्ट में पेनल्टी और सॉफ्ट लोन इंटरेस्ट को लेकर विवादों पर अहम बातें सामने आई हैं।
Bihar Sponge Iron के नतीजे: क्या हुआ?
Bihar Sponge Iron Ltd (BSIL) ने 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही के लिए ₹2.48 करोड़ का नेट प्रॉफिट (Net Profit) दर्ज किया है। लेकिन, यह मुनाफा पूरी तरह से 'अन्य आय' (Other Income) से आया है। कंपनी का प्लांट रीवॉयंपिंग (Revamping) और बड़े मेंटेनेंस के कारण बंद था, जिसकी वजह से ऑपरेशन से कंपनी का रेवेन्यू शून्य रहा। इस तिमाही में नेट रेवेन्यू ₹0.00 करोड़ था, जबकि पिछले साल की समान तिमाही (Q1 FY26) में यह ₹77.50 करोड़ था।
ये क्यों मायने रखता है?
ऑपरेशनल रेवेन्यू का पूरी तरह से शून्य होना बताता है कि कंपनी के मुख्य बिजनेस एक्टिविटीज में अभी ठहराव है। ऐसे में, नेट प्रॉफिट कंपनी की ऑपरेशनल स्ट्रेंथ को नहीं, बल्कि अन्य स्रोतों से आय उत्पन्न करने की क्षमता को दर्शाता है। निवेशकों को अब प्लांट के फिर से शुरू होने और नए एग्रीमेंट के तहत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस पर बारीकी से नजर रखनी होगी।
पूरी कहानी क्या है?
कंपनी ने 19 मार्च 2026 को Vanraj Steels Private Limited (VSPL) के साथ हुए फैसिलिटी यूजर एग्रीमेंट (Facility User Agreement) को खत्म कर दिया था। इसके बाद, 23 मार्च 2026 को M/s. Amalgam Steel & Power Limited के साथ नया एग्रीमेंट साइन किया गया। मौजूदा तिमाही के नतीजे इसी बदलाव के शुरुआती फेज को दिखाते हैं, जिसमें प्लांट मेंटेनेंस के लिए बंद था।
अब आगे क्या?
कंपनी अब M/s. Amalgam Steel & Power Limited के साथ नए एग्रीमेंट के तहत काम कर रही है। अब सारा फोकस प्लांट के सफल संचालन को फिर से शुरू करने और उससे रेवेन्यू जेनरेट करने पर होगा। इसके अलावा, कंपनी को पुराने ऑपरेटर के साथ चल रहे विवादों को सुलझाना होगा और ऑडिटर द्वारा बताए गए कंटिंजेंट लायबिलिटी (Contingent Liabilities) को भी एड्रेस करना होगा।
जोखिम जिन पर नजर रखनी चाहिए
स्टैच्यूटरी ऑडिटर (Statutory Auditor) की रिपोर्ट में कई बड़े जोखिमों पर प्रकाश डाला गया है: South East Coalfields Ltd (SECL) के साथ ₹2.15 करोड़ की पेनल्टी का विवाद, झारखंड सरकार से मिले सॉफ्ट लोन पर ₹121.18 करोड़ के इंटरेस्ट की बड़ी देनदारी (जिसमें से केवल ₹27.46 करोड़ ही प्रोवाइडेड हैं), और पुराने ऑपरेटर VSPL से मिलने वाले बकाये की रिकवरी को लेकर अनिश्चितता। ये अनसुलझे मुद्दे कंपनी के लिए बड़े फाइनेंशियल रिस्क पैदा करते हैं।
ऑडिटर की राय और नोट्स
ऑडिटर्स ने अनिश्चितताओं का हवाला देते हुए एक क्वालिफाइड कंक्लूजन (Qualified Conclusion) दिया है। उन्होंने नोट किया कि SECL से ₹2.15 करोड़ की पेनल्टी का कोई प्रोविजन नहीं बनाया गया है, जिसका कंपनी विरोध कर रही है। सॉफ्ट लोन के इंटरेस्ट की बात करें तो, जहां प्रिंसिपल अमाउंट रिपेय किया जा चुका है, वहीं कंपनी ₹121.18 करोड़ के इंटरेस्ट पर वेवर (Waiver) की मांग कर रही है, जिसमें से सिर्फ ₹27.46 करोड़ प्रोवाइडेड हैं। ऑडिटर्स पुराने ऑपरेटर VSPL से बकाये की रिकवरी पर भी कुछ कहने में असमर्थ रहे।
गवर्नेंस
फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए, M/s. M.K. Singhal & Co. को कॉस्ट ऑडिटर (Cost Auditor) और M/s. Sarat Jain & Associates को इंटरनल ऑडिटर (Internal Auditor) के तौर पर फिर से अपॉइंट किया गया है। बोर्ड ने कंपनी की 44वीं एनुअल जनरल मीटिंग (Annual General Meeting) के लिए नोटिस और डायरेक्टर्स रिपोर्ट को भी मंजूरी दे दी है।
अहम आंकड़े (समय के साथ)
| मेट्रिक | Q1 FY27 (₹ करोड़) | Q1 FY26 (₹ करोड़) | मार्च 2026 तिमाही (₹ करोड़) |
| :--- | :--- | :--- | :--- |
| नेट रेवेन्यू | 0.00 | 77.50 | 15.93 |
| अन्य आय | 6.39 | 6.29 | 5.56 |
| नेट प्रॉफिट | 2.48 | 2.12 | 1.25 |
| ईपीएस (₹) | 0.28 | 0.23 | 0.14 |
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को प्लांट की रीवॉयंपिंग की प्रगति और नए ऑपरेटर के तहत ऑपरेशनल रेवेन्यू जेनरेशन पर नजर रखनी चाहिए। सबसे अहम बात, SECL पेनल्टी और झारखंड सरकार के सॉफ्ट लोन इंटरेस्ट से जुड़े कानूनी विवादों के नतीजों पर नजर रखना कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
