B.R. Goyal Infrastructure ने वित्त वर्ष 2026 के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी के रेवेन्यू में **61%** की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जो **₹815.65 करोड़** पर पहुंच गया है। वहीं, कंपनी का मुनाफा भी **77.76%** बढ़कर **₹44.71 करोड़** रहा।
B.R. Goyal Infrastructure का दमदार प्रदर्शन, बढ़ाई जाएगी कंपनी की क्षमता
वित्त वर्ष 2026 (31 मार्च 2026 को समाप्त) के लिए B.R. Goyal Infrastructure Ltd ने अपने वित्तीय नतीजों का ऐलान किया है। कंपनी के स्टैंडअलोन रेवेन्यू में पिछले साल के मुकाबले करीब 61% की भारी उछाल देखी गई है, जो ₹815.65 करोड़ तक पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष यह आंकड़ा ₹506.83 करोड़ था।
मुनाफे (Profit After Tax - PAT) के मोर्चे पर भी कंपनी ने कमाल किया है। PAT में 77.76% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह ₹44.71 करोड़ रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष (FY 2024-25) में यह ₹25.07 करोड़ था।
मजबूत ऑर्डर बुक और भविष्य की योजनाएं
31 मार्च 2026 तक, कंपनी के पास ₹1,235 करोड़ का मजबूत ऑर्डर बुक है। इसमें 27 EPC कॉन्ट्रैक्ट शामिल हैं, जिनकी कुल कीमत ₹995 करोड़ है। ये कॉन्ट्रैक्ट रोड्स (₹758 करोड़), बिल्डिंग (₹75 करोड़) और वेस्ट वॉटर (₹162 करोड़) जैसे सेक्टर्स में फैले हुए हैं। इसके अलावा, 10 टोल कलेक्शन (TCC) कॉन्ट्रैक्ट भी हैं, जिनकी वैल्यू ₹240 करोड़ है।
शेयरधारकों को मिलेगा डिविडेंड, बढ़ेगी पूंजी
कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹0.25 प्रति इक्विटी शेयर का फाइनल डिविडेंड (Dividend) देने की सिफारिश की है। इसके साथ ही, कंपनी ने पूंजी जुटाने के लिए एक अहम कदम उठाया है। बोर्ड ने 11,00,000 कनवर्टिबल वारंट्स (Convertible Warrants) नॉन-प्रमोटर कैटेगरी को ₹119 प्रति वारंट के भाव पर इश्यू करने की मंजूरी दे दी है। इस पर BSE से इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिलना बाकी है।
निवेशकों के लिए अहम क्यों?
कंपनी के शानदार नतीजे प्रोजेक्ट्स के बेहतर एग्जीक्यूशन और प्रभावी कॉस्ट मैनेजमेंट को दर्शाते हैं। मजबूत ऑर्डर बुक भविष्य की कमाई की अच्छी तस्वीर पेश करती है। वहीं, प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए जुटाई जाने वाली पूंजी कंपनी के विस्तार योजनाओं को पंख लगा सकती है। डिविडेंड की सिफारिश शेयरधारकों के लिए एक अच्छी खबर है।
क्या हैं जोखिम?
निवेशकों को कंपनी के प्रेमिसेस पर जनवरी 2026 में हुई इनकम टैक्स सर्च (Income Tax Search) के नतीजों पर नजर रखनी चाहिए। हालांकि कंपनी ने सहयोग किया और कोई तत्काल नोटिस नहीं मिला। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2014-15 के लिए कॉस्ट ऑडिट रिपोर्ट फाइल न करने के आरोप में कोर्ट से मिले समन का प्रबंधन को जवाब देना होगा।
