BHEL की नॉर्वे की Hystar के साथ ग्रीन हाइड्रोजन में बड़ी डील, PEM Electrolysers का होगा भारत में निर्माण

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AuthorMehul Desai|Published at:
BHEL की नॉर्वे की Hystar के साथ ग्रीन हाइड्रोजन में बड़ी डील, PEM Electrolysers का होगा भारत में निर्माण

भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) ने नॉर्वे की कंपनी Hystar AS के साथ एक बड़ी स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की है। इस समझौते के तहत, भारत में ग्रीन हाइड्रोजन के लिए PEM (Proton Exchange Membrane) Electrolyser सिस्टम का स्थानीय स्तर पर निर्माण किया जाएगा। यह कदम BHEL के ग्रीन हाइड्रोजन कारोबार को और मजबूती देगा, क्योंकि कंपनी पहले से ही अल्कलाइन (alkaline) इलेक्ट्रोलाइजर के लिए एक समझौते में है।

BHEL ने नॉर्वे की Hystar के साथ किया ग्रीन हाइड्रोजन में बड़ा समझौता

भारत की सरकारी कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) ने ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को और बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। BHEL ने नॉर्वे की Hystar AS के साथ एक स्ट्रैटेजिक कोलैबोरेशन एग्रीमेंट (SCA) साइन किया है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भारत में ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स के लिए प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) इलेक्ट्रोलाइजर सिस्टम को विकसित करना और तैनात करना है।

क्यों है यह डील अहम?

इस साझेदारी का लक्ष्य भारत में PEM इलेक्ट्रोलाइजर सिस्टम का स्वदेशीकरण (indigenization) और स्थानीय निर्माण करना है। इससे ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स को लागू करने में BHEL की क्षमताएं और मजबूत होंगी। यह समझौता भारत की नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और 'मेक इन इंडिया' पहल को भी बड़ा सहारा देगा। इस कदम से BHEL भारत के तेजी से बढ़ते ग्रीन हाइड्रोजन बाजार में PEM और अल्कलाइन, दोनों तरह के इलेक्ट्रोलाइजर समाधान पेश करने में सक्षम होगा, जिससे कंपनी को एक बड़ा फायदा मिलेगा।

BHEL की ग्रीन हाइड्रोजन में पुरानी सक्रियता

BHEL ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में लगातार अपनी उपस्थिति बना रहा है। इससे पहले, जुलाई 2026 में, कंपनी ने अल्कलाइन इलेक्ट्रोलाइजर सिस्टम के लिए thyssenkrupp nucera India Private Limited के साथ भी इसी तरह का एक स्ट्रैटेजिक समझौता किया था।

अब क्या बदलेगा?

इस नई डील के साथ, BHEL ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में अपनी तकनीकी पेशकशों (technological offerings) को काफी बेहतर बना रहा है। अब यह उन चुनिंदा भारतीय कंपनियों में से एक बन गया है जो दोनों प्रकार की इलेक्ट्रोलाइजर टेक्नोलॉजी, PEM और अल्कलाइन, की आपूर्ति कर सकती हैं। इससे विभिन्न प्रोजेक्ट्स की विविध जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा।

किन जोखिमों पर रहेगी नजर?

हालांकि यह समझौता टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और स्थानीय निर्माण पर केंद्रित है, लेकिन इस वेंचर की सफलता ग्रीन हाइड्रोजन को बाजार में स्वीकार्यता मिलने, इलेक्ट्रोलाइजर की प्रतिस्पर्धी कीमत तय होने और BHEL की उत्पादन क्षमता को प्रभावी ढंग से बढ़ाने की क्षमता पर निर्भर करेगी।

सहकर्मी कंपनियों से तुलना

BHEL खुद को इलेक्ट्रोलाइजर सेगमेंट में एक व्यापक समाधान प्रदाता (comprehensive solution provider) के रूप में स्थापित कर रहा है। यह उन कंपनियों से अलग है जो केवल एक प्रकार की तकनीक पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

आगे क्या देखना महत्वपूर्ण होगा?

निवेशक BHEL की PEM इलेक्ट्रोलाइजर टेक्नोलॉजी को स्थानीय बनाने की प्रगति, शुरुआती ऑर्डर हासिल करने और भारत के ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम के समग्र विकास पर बारीकी से नजर रखेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.