भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) ने ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर सिस्टम की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग के लिए thyssenkrupp nucera India के साथ एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का मकसद ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स को तेजी से लागू करना है और यह भारत के नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है।
BHEL और thyssenkrupp nucera का नया कदम
सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) और thyssenkrupp nucera India Private Limited के बीच एक स्ट्रेटेजिक कोलैबोरेशन एग्रीमेंट (SCA) हुआ है। यह डील खास तौर पर अल्कलाइन इलेक्ट्रोलाइजर सिस्टम्स (Alkaline Electrolyser Systems) की लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस करती है, जो ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए बेहद ज़रूरी हैं।
इस डील का महत्व
यह कोलैबोरेशन भारत में इलेक्ट्रोलाइजर सिस्टम्स के फेज्ड इंडिजनाइजेशन (phased indigenization) और लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगा। उम्मीद है कि इससे BHEL की ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की क्षमता बढ़ेगी। साथ ही, यह भारत के नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और 'मेक इन इंडिया' पहल को भी मजबूती देगा।
बैकग्राउंड
BHEL इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की एक बड़ी कंपनी है, जो पावर जनरेशन इक्विपमेंट और इंडस्ट्रियल सिस्टम्स में काम करती है। वहीं, thyssenkrupp nucera इलेक्ट्रोलाइसिस टेक्नोलॉजी में एक ग्लोबल प्लेयर है।
अब आगे क्या?
इस समझौते के बाद BHEL अब बढ़ते ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में एक बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। इलेक्ट्रोलाइजर जैसे महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स की लोकल मैन्युफैक्चरिंग से इंपोर्ट पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है और सरकार की तरफ से मिलने वाले इंसेटिव्स का फायदा भी उठाया जा सकता है।
किन बातों पर रखें नज़र?
इस डील से जुड़े वित्तीय पहलुओं को फिलहाल गोपनीय रखा गया है। निवेशकों को BHEL की ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स के लिए ऑर्डर हासिल करने और उन्हें सफलतापूर्वक लागू करने की क्षमता पर नज़र रखनी चाहिए।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों को BHEL द्वारा लोकल मैन्युफैक्चरिंग के माइलस्टोन्स और इस सहयोग से मिलने वाले ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स को जीतने और लागू करने में उसकी सफलता पर नज़र रखनी चाहिए।
