सरकारी कंपनी BHEL ने Q2 के दमदार नतीजे पेश किए हैं, जहां नेट प्रॉफिट में **117.8%** का जबरदस्त उछाल आया है। हालांकि, शानदार परफॉर्मेंस के बावजूद बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की कमी और सूडान प्रोजेक्ट से जुड़े बकाये ने निवेशकों के लिए चिंता पैदा कर दी है।
सरकारी दिग्गज कंपनी BHEL के वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के नतीजे काफी मजबूत रहे हैं। कंपनी ने रेवेन्यू में 23.8% की ग्रोथ दर्ज की है, जिससे यह आंकड़ा ₹9,300.35 करोड़ पर पहुंच गया है। वहीं, नेट प्रॉफिट ₹820.94 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹376.89 करोड़ के मुकाबले 117.8% ज्यादा है।
गवर्नेंस पर उठे सवाल
ऑपरेशनल फ्रंट पर दमदार प्रदर्शन के बावजूद कंपनी ने एक बड़ी कमी को सार्वजनिक किया है। फिलहाल BHEL के बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स (Independent Directors) मौजूद नहीं हैं। इस कारण कंपनी की ऑडिट कमिटी का गठन SEBI के नियमों और कंपनी एक्ट के अनुसार नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि ये नतीजे सीधे बोर्ड के पास मंजूरी के लिए भेजे गए थे।
रिस्क फैक्टर: सूडान प्रोजेक्ट का बकाया
निवेशकों को दो प्रमुख जोखिमों पर नजर रखनी चाहिए:
सूडान बकाया (Sudan Receivables): कंपनी को सूडान के STPG (पूर्व में NEC Sudan) से ₹196 करोड़ मिलने बाकी हैं। हालांकि मैनेजमेंट का कहना है कि यह एसेट अभी भी सुरक्षित है, लेकिन अगर इसके लिए प्रोविजनिंग की गई, तो कंपनी के प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) पर करीब ₹176 करोड़ का असर पड़ सकता है।
गवर्नेंस का गैप: बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की नियुक्ति न होना एक बड़ी कॉर्पोरेट गवर्नेंस चिंता है, जिसे कंपनी को जल्द से जल्द सुलझाना होगा।
अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी बोर्ड में डायरेक्टर्स की नियुक्ति कब करती है और सूडान के बकाया मामले में भविष्य में क्या कदम उठाती है।
