B. L. Kashyap and Sons Ltd ने अपने लीड लेंडर के साथ 'राइट ऑफ रिकंपेंस' (ROR) लायबिलिटी को लेकर बड़ी सहमति बनाई है। कंपनी को मार्च 2027 तक ₹52.5 करोड़ का भुगतान करना होगा, हालांकि अभी पूरे कंसोर्टियम की मंजूरी का इंतजार है।
कर्ज के बोझ पर स्पष्टता
B. L. Kashyap and Sons Ltd ने अपने CDR लेंडर्स को देय ₹52.5 करोड़ की 'राइट ऑफ रिकंपेंस' (ROR) लायबिलिटी को स्वीकार कर लिया है। इस रकम को चुकाने के लिए कंपनी ने 31 मार्च, 2027 की समय-सीमा तय की है। यह डेवलपमेंट कंपनी के बैलेंस शीट पर लंबे समय से चले आ रहे कर्ज के दावों को सुलझाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
इस खुलासे से कंपनी की कर्ज संबंधी अनिश्चितता में कमी आई है। एक निश्चित राशि और पेमेंट विंडो तय होने से कंपनी को अगले 3 फाइनेंशियल ईयर के लिए अपना कैश फ्लो बेहतर तरीके से प्लान करने में मदद मिलेगी। इससे बाजार में कंपनी के प्रति भरोसा बढ़ सकता है।
अभी आगे क्या?
हालाँकि लीड बैंक ने इन शर्तों की पुष्टि कर दी है, लेकिन पूरी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए कंसोर्टियम के बाकी बैंकों की सहमति आना अभी बाकी है। कंपनी ने साफ किया है कि जैसे ही बाकी लेंडर्स से मंजूरी मिलेगी, भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
निवेशकों को अब BSE फाइलिंग्स पर नजर रखनी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि अन्य लेंडर्स ने इस पर क्या रुख अपनाया है। किसी भी तरह का बदलाव या देरी शेयर पर असर डाल सकती है।
