B. L. Kashyap के FY26 के नतीजे: रेवेन्यू में बड़ी बढ़त, पर प्रॉफिट पर लगा झटका
B. L. Kashyap and Sons Ltd ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपने कंसोलिडेटेड नतीजे जारी किए हैं। कंपनी के ऑपरेशन्स से रेवेन्यू 19.5% बढ़कर ₹1,379.14 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹1,153.63 करोड़ था। वहीं, EBITDA में 56.4% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह ₹102.22 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले साल ₹65.34 करोड़ था।
प्रॉफिट (PAT) में भारी गिरावट का कारण
इन सब सकारात्मकগুলোর के बावजूद, कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 94.4% गिरकर सिर्फ ₹1.55 करोड़ रह गया, जबकि FY25 में यह ₹27.48 करोड़ था। इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह चौथी तिमाही (Q4 FY26) में ₹37.82 करोड़ के 'एक्सेप्शनल आइटम्स' (exceptional items) यानी खास खर्चों का होना रहा। इसमें 'राइट ऑफ रीकॉम्पेंस' (ROR) के लिए ₹20 करोड़ और 'कॉन्ट्रैक्ट एसेट्स' के ₹17.82 करोड़ के राइट-ऑफ (write-off) शामिल हैं।
कर्ज़ में कमी और मजबूत ऑर्डर बुक
कंपनी के लिए राहत की बात यह है कि उसने अपने फाइनेंसियल स्ट्रक्चर को काफी मजबूत किया है। कंपनी का कर्ज़ लगभग ₹700 करोड़ से घटकर ₹270 करोड़ पर आ गया है। इसके साथ ही, 31 मार्च 2026 तक कंपनी के पास ₹5,296 करोड़ का एक तगड़ा ऑर्डर बुक है, जो आने वाले समय के लिए अच्छी रेवेन्यू विजिबिलिटी (revenue visibility) सुनिश्चित करता है।
आगे क्या?
कंपनी अब केवल वर्किंग कैपिटल और बैंक गारंटी लिमिट्स पर काम कर रही है, क्योंकि उसने टर्म लोंस (term loans) को पूरी तरह खत्म कर दिया है। मैनेजमेंट FY27 के लिए ₹65 करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर (capital expenditure) की योजना बना रहा है, जिसका फोकस इनोवेशन (innovation), अपस्किलिंग (upskilling) और फिक्स्ड एसेट्स (fixed assets) पर रहेगा। निवेशकों को कंपनी की नॉन-कोर एसेट्स (non-core assets) को FY27 तक मोनेटाइज (monetize) करने की प्रगति और सरकारी प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति पर नज़र रखनी चाहिए।
जोखिम
निवेशकों को खास तौर पर एक्सेप्शनल आइटम्स के कारण तिमाही नतीजों पर पड़ने वाले असर पर ध्यान देना होगा। इसके अलावा, ऑर्डर बुक में हरियाणा का 52.50% हिस्सा है, जो भौगोलिक एकाग्रता (geographical concentration) का जोखिम पैदा कर सकता है।
