Axtel Industries ने IISc की फाउंडेशन फॉर साइंस, इनोवेशन एंड डेवलपमेंट (FSID) के साथ एक एक्सक्लूसिव टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग एग्रीमेंट साइन किया है। इसके तहत कंपनी क्रायोजेनिक ग्राइंडिंग (Cryogenic Grinding) टेक्नोलॉजी का कमर्शियलाइजेशन करेगी, जो पॉलिमर और रेजिन के लिए फाइन पाउडर बनाने में सक्षम है।
टेक्नोलॉजी और डील की शर्तें
इस एग्रीमेंट के जरिए Axtel Industries को 'काउंटर-रोटेटिंग पिन मिल' और 'क्रायोजेनिक कन्वेइंग सिस्टम' को कमर्शियल तौर पर उतारने का विशेष अधिकार मिल गया है। यह तकनीक 'मिनिस्ट्री ऑफ हेवी इंडस्ट्रीज' की कैपिटल गुड्स स्कीम के तहत विकसित की गई है। वित्तीय सौदे की बात करें तो, प्रोटोटाइप के लिए कंपनी ₹3 करोड़ खर्च करेगी, साथ ही सेल्स से जुड़ी रॉयल्टी की सीमा भी ₹3 करोड़ तय की गई है।
क्यों है यह पार्टनरशिप खास?
पॉलिमर, रबर और रेजिन के बाजार में अभी तक भारत काफी हद तक आयातित मशीनरी पर निर्भर था। इस नई स्वदेशी तकनीक के साथ, Axtel के पास अब हाई-एंड मैन्युफैक्चरिंग में एक बड़ी बढ़त होगी। यह कदम 'आत्मनिर्भर भारत' विजन के तहत विदेशी सप्लायर्स के एकाधिकार को चुनौती देने की तैयारी है।
आगे की राह और रिस्क
कंपनी अब इस टेक्नोलॉजी को अपने मौजूदा पोर्टफोलियो में इंटीग्रेट करने पर काम शुरू करेगी। निवेशकों के लिए ध्यान रखने वाली बात यह है कि इस प्रोडक्ट की सफलता पूरी तरह से मार्केट एडॉप्शन और इंडस्ट्रियल ग्राहकों द्वारा पुराने सिस्टम को छोड़कर नई टेक्नोलॉजी अपनाने पर निर्भर करेगी। कंपनी का रेवेन्यू कब तक बढ़ेगा, यह अब इसके मैन्युफैक्चरिंग टाइमलाइन पर निर्भर करेगा।
