Atlas Cycles ने जून तिमाही में ₹1.92 करोड़ का नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है, जबकि कंपनी की कमाई सिर्फ ₹1.54 करोड़ रही। सबसे अहम बात यह है कि कंपनी को अपनी ज़मीन की बिक्री के लिए **31 दिसंबर, 2026** तक का वक्त मिल गया है। हालांकि, ऑडिटर्स ने कंपनी की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
Atlas Cycles का वित्तीय हाल:
Atlas Cycles (Haryana) Ltd. ने 30 जून, 2026 को समाप्त हुई पहली तिमाही के लिए ₹1.92 करोड़ का शुद्ध घाटा (Net Loss) दर्ज किया है। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) केवल ₹1.54 करोड़ रहा। पिछले तिमाही के ₹2.56 करोड़ के मुकाबले यह घाटा कम हुआ है, लेकिन कंपनी अभी भी घाटे में चल रही है।
ज़मीन बिक्री की बढ़ी डेडलाइन:
निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण खबर यह है कि कंपनी को हरियाणा के सोनीपत (Sonepat) में अपनी ज़मीन की बिक्री के लिए खरीदार को 31 दिसंबर, 2026 तक की मोहलत मिली है। यह ज़मीन बिक्री कंपनी के लिए नकदी जुटाने और कर्ज चुकाने के लिहाज़ से काफी अहम है। कंपनी को इस डील से पहले ही ₹45 करोड़ की एडवांस राशि मिल चुकी है और 30 अक्टूबर, 2026 तक ₹15 करोड़ और मिलने की उम्मीद है।
ऑडिटर्स की चिंताएं:
कंपनी के ऑडिटर्स ने अपनी रिपोर्ट में कुछ गंभीर चिंताएं जताई हैं। उन्होंने कहा है कि कंपनी ने लेनदारों (Creditors), खासकर MSMEs को बकाया राशि पर ब्याज का प्रावधान (Interest Provisioning) नहीं किया है। इसके अलावा, एक डिफ़ॉल्टेड इंटर-कॉर्पोरेट लोन (Inter Corporate Loan) पर भी ब्याज की देनदारी ₹0.25 करोड़ को इस तिमाही के नतीजों में शामिल नहीं किया गया है। ये मुद्दे कंपनी के वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं।
आगे क्या?
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि कंपनी ज़मीन की बची हुई ₹15 करोड़ की राशि कब तक प्राप्त करती है और बिक्री की प्रक्रिया कब पूरी होती है। साथ ही, ऑडिटर्स द्वारा उठाई गई चिंताओं को कंपनी कैसे दूर करती है, यह देखना भी अहम होगा।
