Ashoka Buildcon Q4 Results: मुनाफे में गिरावट, पर कंपनी ने FY27 के लिए ठोका 20% रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Ashoka Buildcon Q4 Results: मुनाफे में गिरावट, पर कंपनी ने FY27 के लिए ठोका 20% रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य!
Overview

Ashoka Buildcon के लिए Q4 FY26 नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट (Net Profit) घटकर ₹49 करोड़ रहा, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹60 करोड़ था। हालांकि, कंपनी FY27 में 20% रेवेन्यू ग्रोथ और **9.5%** से **10.5%** EBITDA मार्जिन का लक्ष्य लेकर चल रही है।

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Ashoka Buildcon ने Q4 FY26 के नतीजों का किया ऐलान, FY27 के लिए बनाई रणनीति

Ashoka Buildcon ने FY26 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड टोटल इनकम ₹1,992 करोड़ रहा। वहीं, स्टैंडअलोन आधार पर टोटल इनकम ₹1,819 करोड़ दर्ज किया गया, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹2,012 करोड़ की तुलना में 10% कम है। कंपनी का स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) इस तिमाही में ₹49 करोड़ रहा, जो Q4 FY25 में ₹60 करोड़ था। इस तिमाही में EBITDA मार्जिन 9.2% पर रहा, जिस पर जियोपॉलिटिकल मसलों, बढ़ती इनपुट कॉस्ट (Input Cost) और ₹28 करोड़ के एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस (ECL) प्रोविजन का असर देखा गया।

मजबूत ऑर्डर बुक से FY27 में ग्रोथ की उम्मीद

Q4 के मिले-जुले प्रदर्शन के बावजूद, Ashoka Buildcon आने वाले FY27 के लिए शानदार ग्रोथ की उम्मीद कर रही है। कंपनी ने नए फाइनेंशियल ईयर के लिए 20% रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य रखा है। इस उम्मीद को कंपनी की ₹15,312 करोड़ की बड़ी कंसोलिडेटेड ऑर्डर बुक से बल मिल रहा है, जो भविष्य के रेवेन्यू के लिए अच्छी विजिबिलिटी दे रही है।

एसेट मोनेटाइजेशन और वर्किंग कैपिटल पर फोकस

फाइनेंशियल पोजीशन को मजबूत करने के लिए, Ashoka Buildcon अपने एसेट्स (Assets) को बेचकर पैसा जुटाने पर जोर दे रही है, खासकर अपने हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) स्पेशल पर्पज व्हीकल्स (SPVs) के जरिए। कंपनी को उम्मीद है कि जून 2026 तक इन संपत्तियों की बिक्री से करीब ₹750 करोड़ और दिसंबर 2026 तक ₹400 करोड़ अतिरिक्त जुटेंगे। मैनेजमेंट वर्किंग कैपिटल साइकिल को सुधारने पर भी ध्यान दे रही है, जो FY26 में दोगुना हो गया था। कंपनी का लक्ष्य सितंबर 2026 तक इसे वापस 110-120 दिनों पर लाना है।

मुख्य जोखिम और आगे की निगरानी

निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे लागत में और बढ़ोतरी या अतिरिक्त ECL प्रोविजन से होने वाले संभावित मार्जिन दबावों पर नज़र रखें। वर्किंग कैपिटल साइकिल का लंबा होना लिक्विडिटी (Liquidity) के लिए एक बड़ी चिंता बना हुआ है। NHAI का एक नया सर्कुलर, जो प्रोजेक्ट फेल होने के आधार पर बिडर्स को डिसक्वालिफाई करने से जुड़ा है, एक रेगुलेटरी रिस्क (Regulatory Risk) पेश करता है, जिस पर फिलहाल रोड फेडरेशन के साथ चर्चा चल रही है। कंपनी FY27 में ₹8,000 करोड़ से ₹10,000 करोड़ के बीच नए ऑर्डर आने की उम्मीद कर रही है, और पूरे साल के लिए EBITDA मार्जिन को बढ़ाकर 9.5% से 10.5% करने का लक्ष्य है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.