Apollo Micro Systems ने अधिग्रहण (Acquisitions) और कर्ज चुकाने (Debt Repayment) के लिए **₹3,322.23 करोड़** का प्रेफरेंशियल इश्यू (Preferential Issue) लाने की घोषणा की है। इस इश्यू में इक्विटी शेयर और वारंट्स शामिल होंगे। कंपनी का लक्ष्य डिफेंस सेक्टर में एंड-टू-एंड सिस्टम बनाने का है।
क्या है कंपनी की योजना?
Apollo Micro Systems के बोर्ड ने शेयरधारकों की मंजूरी के लिए एक एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत, कंपनी लगभग ₹951.14 करोड़ के 2.28 करोड़ इक्विटी शेयर और करीब ₹2,371.09 करोड़ के 5.69 करोड़ कनवर्टिबल इक्विटी वारंट जारी करेगी। इश्यू की कीमत ₹416.60 प्रति शेयर या वारंट तय की गई है।
क्यों हो रहा है यह फंड जुटाना?
इस बड़े फंड जुटाने का मुख्य उद्देश्य डिफेंस सेक्टर में स्ट्रेटेजिक अधिग्रहण (Strategic Acquisitions) करना है, ताकि कंपनी एंड-टू-एंड इंटीग्रेटेड डिफेंस सिस्टम बना सके। इसके अलावा, जुटाई गई राशि का इस्तेमाल कर्ज चुकाने और वर्किंग कैपिटल (Working Capital) की जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। इससे कंपनी पर ब्याज का बोझ कम होगा और डेट-इक्विटी रेशियो (Debt-Equity Ratio) में सुधार होगा।
कंपनी का बैकग्राउंड
Apollo Micro Systems डिफेंस सेक्टर में एक जानी-मानी कंपनी है। इस कदम से कंपनी अपनी क्षमताओं को बढ़ाने और इनऑर्गेनिक ग्रोथ (Inorganic Growth) के जरिए मार्केट में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है। कंपनी ने अपनी उधार सीमा (Borrowing Limit) को ₹5,000 करोड़ और निवेश/लोन/गारंटी सीमा (Investment/Loan/Guarantee Limit) को ₹7,000 करोड़ तक बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा है।
आगे क्या?
अगर शेयरधारकों की मंजूरी मिलती है, तो कंपनी एक आक्रामक विस्तार (Aggressive Expansion) के दौर में प्रवेश करेगी। उम्मीद है कि फंड मिलने के 9 महीने के भीतर इसका इस्तेमाल शुरू हो जाएगा। Acuite Ratings and Research Limited को फंड के उपयोग की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
निवेशकों के लिए रिस्क
नए शेयर और वारंट जारी होने से मौजूदा शेयरधारकों (Existing Shareholders) के लिए इक्विटी डाइल्यूशन (Equity Dilution) का खतरा है। कंपनी की ग्रोथ स्ट्रेटेजी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह टारगेट कंपनियों को कितनी प्रभावी ढंग से पहचानती है, उनका अधिग्रहण करती है और उन्हें इंटीग्रेट करती है।
