Apollo Micro Systems: ₹3,322 करोड़ जुटाने की तैयारी, शेयर और वारंट से होगा फंडरेज़

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AuthorNeha Patil|Published at:
Apollo Micro Systems: ₹3,322 करोड़ जुटाने की तैयारी, शेयर और वारंट से होगा फंडरेज़

Apollo Micro Systems ने ₹3,322 करोड़ तक की बड़ी पूंजी जुटाने की मंजूरी दे दी है। यह फंड शेयर और कनवर्टिबल वारंट्स के प्रीफरेंशियल इश्यू (Preferential Issue) के जरिए जुटाया जाएगा।

Apollo Micro Systems जुटाएगा ₹3,322 करोड़

फंडरेज़िंग: ₹951.14 करोड़ इक्विटी शेयर से, ₹2,371.09 करोड़ वारंट से

क्या हुआ?

Apollo Micro Systems के बोर्ड ने बड़े पैमाने पर फंड जुटाने की योजना को हरी झंडी दे दी है। कंपनी करीब 2.28 करोड़ इक्विटी शेयर और 5.69 करोड़ कनवर्टिबल वारंट्स जारी करेगी। प्रत्येक शेयर/वारंट की इश्यू प्राइस ₹416.60 रखी गई है। इससे कंपनी इक्विटी शेयर से करीब ₹951.14 करोड़ और वारंट्स से लगभग ₹2,371.09 करोड़ जुटा सकती है। इस तरह, कुल मिलाकर ₹3,322.23 करोड़ जुटाने का लक्ष्य है।

ये इक्विटी शेयर 55 नॉन-प्रमोटर निवेशकों को दिए जाएंगे, जबकि कनवर्टिबल वारंट्स प्रमोटर ग्रुप और नॉन-प्रमोटर दोनों तरह के निवेशकों को ऑफर किए गए हैं। वारंट्स खरीदने वाले निवेशकों को इश्यू प्राइस का 25% एडवांस में भुगतान करना होगा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह?

यह कदम Apollo Micro Systems के लिए काफी अहम है क्योंकि कंपनी अपनी लिक्विडिटी (Liquidity) बढ़ाना चाहती है। इस फंड का इस्तेमाल कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ (Growth) योजनाओं और रीफाइनेंसिंग (Refinancing) स्ट्रेटेजी को सपोर्ट करने के लिए किया जाएगा। प्रमोटर्स का वारंट इश्यू में हिस्सा लेना कंपनी के भविष्य के प्रति उनके भरोसे को दर्शाता है।

आगे क्या?

बोर्ड की मंजूरी के बाद, कंपनी का अधिकृत शेयर कैपिटल (Authorized Share Capital) ₹45 करोड़ से बढ़ाकर ₹63 करोड़ कर दिया गया है ताकि इन नए इश्यू को समायोजित किया जा सके। फंड के सही इस्तेमाल की निगरानी के लिए Acuité Ratings & Research को नियुक्त किया गया है।

जोखिम

इस योजना के सफल होने के लिए शेयरहोल्डर्स की मंजूरी सबसे बड़ी बाधा है, जो आगामी एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) में ली जाएगी। साथ ही, निर्धारित कीमत पर सभी शेयर और वारंट्स का सफलतापूर्वक अलॉटमेंट भी महत्वपूर्ण होगा।

भविष्य की राह

निवेशकों को 4 अगस्त, 2026 को होने वाली EGM के नतीजों पर बारीकी से नज़र रखनी चाहिए। इसके बाद, जुटाए गए फंड के उपयोग और उसके डिप्लॉयमेंट (Deployment) से जुड़ी घोषणाएं महत्वपूर्ण संकेत देंगी।

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