Ambuja Cements ने सितंबर 2026 तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट गिरकर **₹193 करोड़** रह गया है, जो पिछले साल इसी अवधि में **₹1,774 करोड़** था। नतीजों पर 'वॉलंटरी सेवरेंस स्कीम' (VSS) के **₹85 करोड़** के खर्च का भारी असर पड़ा है।
मुनाफे में बड़ी गिरावट की वजह
कंपनी के मुनाफे में यह गिरावट मुख्य रूप से 'वॉलंटरी सेवरेंस स्कीम' (VSS) के तहत किए गए ₹85 करोड़ के प्रोविजन की वजह से आई है। यह स्कीम स्थायी और थर्ड-पार्टी कर्मचारियों के लिए थी। अगर छमाही आधार (Half-year) पर देखें, तो कंपनी ने ₹770 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया है, जबकि कुल रेवेन्यू ₹18,640 करोड़ रहा है।
रिन्यूएबल एनर्जी में बड़ा निवेश
नतीजों के साथ ही कंपनी ने ग्रीन एनर्जी की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। Ambuja Cements ने SWE Renewables Limited में 26% की हिस्सेदारी ₹33.75 करोड़ में खरीदने का ऐलान किया है। इस डील का मकसद भविष्य में बिजली की लागत को कम करना है। कंपनी अपनी कैप्टिव एनर्जी संरचना में विंड पावर को जोड़ रही है, जिसके अगले 15 महीनों में पूरा होने की उम्मीद है।
कानूनी पचड़ों का साया
कंपनी के सिर पर अभी भी CCI से जुड़े पुराने कानूनी विवादों का बोझ है। इसमें साल 2016 का ₹1,164 करोड़ का पेनल्टी मामला शामिल है, जो सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। इसके अलावा, 2017 की ₹30 करोड़ की पेनल्टी का मामला NCLAT में चल रहा है। मैनेजमेंट का कहना है कि उन्होंने इन पेनल्टी के लिए अभी कोई अलग से प्रोविजन नहीं किया है क्योंकि उन्हें अपने केस के मजबूत होने का भरोसा है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि रिन्यूएबल एनर्जी का एकीकरण कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन में कितनी सुधार लाता है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट और NCLAT की सुनवाई के नतीजे स्टॉक के नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
