Alliance Integrated Metaliks Ltd की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कंपनी का नेट लॉस बढ़कर **₹95.44 करोड़** पर पहुंच गया है, जबकि कंपनी पर भारी कर्ज और ED की कार्रवाई का साया भी मंडरा रहा है।
गहरी होती वित्तीय मुसीबतें
कंपनी ने अपने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के नतीजे जारी कर दिए हैं, जो चिंताजनक स्थिति को दर्शाते हैं। पिछले साल की तुलना में रेवेन्यू घटकर ₹75.50 करोड़ रह गया है। वहीं, नेट लॉस ₹95.44 करोड़ तक बढ़ गया है, जिससे अर्निंग्स पर शेयर (EPS) गिरकर (2.42) हो गया है। कंपनी का कुल कर्ज बढ़कर ₹581.14 करोड़ हो चुका है और नेट वर्थ ₹359 करोड़ के नेगेटिव दायरे में है।
क्यों है चिंता? (NPA और ऑडिटर्स की चेतावनी)
बैंकों ने कंपनी के लोन को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) के रूप में वर्गीकृत कर दिया है क्योंकि ब्याज और मूलधन का भुगतान नहीं हो सका। कंपनी फिलहाल कर्ज कम करने के लिए बैंकों के साथ वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) पर बातचीत कर रही है। सबसे गंभीर बात यह है कि ऑडिटर्स ने कंपनी के 'गोइंग कंसर्न' (कारोबार जारी रखने) की क्षमता पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि कंपनी की लायबिलिटीज उसकी एसेट्स से कहीं ज्यादा हैं।
कानूनी शिकंजा और कॉर्पोरेट बदलाव
सितंबर 2024 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कंपनी की कुछ प्रॉपर्टी और प्रमोटर्स के शेयरों को कुर्क करने का आदेश दिया था। कंपनी ने इसे अदालत में चुनौती दी है। बोर्ड स्तर पर भी बड़े बदलाव हुए हैं, जहां शिवानी दीक्षित को कंपनी सेक्रेटरी और विनीत कुमार ओझा को एडिशनल नॉन-एक्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त किया गया है।
भविष्य की राह
कंपनी ने चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद 7,406 MT के ब्रिज स्ट्रक्चरल स्टील प्रोजेक्ट्स पूरे किए हैं। मैनेजमेंट अब अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी सुधारने के लिए 'लाइन प्रोडक्शन मॉडल' की ओर शिफ्ट होने की योजना बना रहा है, ताकि अगले दो सालों में कैश फ्लो बेहतर हो सके। निवेशकों के लिए अब बैंकों के साथ बातचीत और कानूनी फैसलों पर नजर रखना बेहद जरूरी है।
